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SC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द, संसद को ही है सूची बदलने का अधिकार।

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Spot TV News | Patna/New Delhi: सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2024 में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए बिहार सरकार की उस अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित कर दिया है, जिसके माध्यम से तांती-तंतवा (पान) जाति को अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल किया गया था।

न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों की सूची में किसी भी प्रकार का परिवर्तन, संशोधन या नई जाति को शामिल करने का अधिकार केवल संसद को है। राज्य सरकारें इस संबंध में स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय नहीं ले सकतीं।

2015 से मिले लाभ निरस्त

कोर्ट ने आदेश दिया है कि वर्ष 2015 से संबंधित जाति को जो भी एससी आरक्षण का लाभ दिया गया था, वह निरस्त माना जाएगा। साथ ही निर्देश दिया गया है कि संबंधित लाभार्थियों को अति पिछड़ा वर्ग (EBC) श्रेणी में समायोजित किया जाए।इसके अतिरिक्त, एससी कोटे में उत्पन्न रिक्तियों को वास्तविक अनुसूचित जाति के पात्र अभ्यर्थियों से भरने का आदेश भी दिया गया है।

संविधान की मूल भावना की पुनः पुष्टि

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में दोहराया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्रदत्त आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक बहिष्कार और विशेष रूप से अस्पृश्यता जैसी अमानवीय प्रथाओं से उत्पन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक वंचना है। संविधान निर्माताओं ने इन वर्गों को प्रतिनिधित्व, समान अवसर और गरिमा प्रदान करने के उद्देश्य से विशेष संरक्षण की व्यवस्था की थी।

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राजनीतिक हलकों में तेज हुई बहस

इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार पर अनुसूचित जातियों के अधिकारों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। बिहार कांग्रेस नेता आदित्य पासवान, ने इसे बिहार की भाजपा-जदयू सरकार की नीतिगत विफलता बताया है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अनुसूचित जाति वर्ग को “दलित-महादलित” में बांटकर कमजोर करने का आरोप लगाया है। हालांकि, सरकार की ओर से इस फैसले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

कानूनी और सामाजिक महत्व

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय संविधान की वैधानिक संरचना और आरक्षण व्यवस्था की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। यह फैसला भविष्य में राज्यों द्वारा एससी सूची में एकतरफा बदलाव करने की संभावनाओं पर भी रोक लगाता है।

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