
Patna,R.Kumar: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की दमदार जीत के महज दो महीने बाद ही सूबे की सियासत में एक बार फिर बड़ी सियासी सरगर्मी के संकेत मिल रहे हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में दलबदल की आहट ने साफ कर दिया है कि बिहार का सियासी रण अभी थमा नहीं है। दोनों ओर से जोर आजमाइश जारी है।

कांग्रेस में असंतोष क्यों?
सबसे चौंकाने वाली खबर कांग्रेस के अंदर से सामने आ रही है! कहा ये जा रहा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, मनोज विश्वास, अबिदुर रहमान, कमरुल होदा और मनोहर प्रसाद जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं।
इनमें से दो विधायक, सुरेंद्र प्रसाद और अभिषेक रंजन, हाल ही में कांग्रेस की ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ मीटिंग से अनुपस्थित रहे, जो उनके नाराजगी का संकेत है। इसके बाद सभी विधायकों ने ‘दही-चूड़ा’ भोज में भी शिरकत नहीं की। रंजन पिछले कुछ हफ्तों से लगभग सभी पार्टी कार्यक्रमों से गायब हैं।
कांग्रेस सूत्रों कि माने तो, विधायक पार्टी की संगठनात्मक निष्क्रियता और नेतृत्व से नाराज हैं। वहीं कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इन अटकलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज भी किया है। लेकिन यदि यह दावा सच साबित हुआ, तो 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस का आंकड़ा शून्य हो जाएगा है।
NDA के भीतर भी जारी है ‘नंबर गेम’
आग सिर्फ विपक्ष ही नहीं लगी है, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के अंदर भी वर्चस्व की जंग तेज हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी और जदयू दोनों ही गठबंधन में ‘नंबर वन’ बनने की कोशिश में एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायकों की ‘मोर्चाबंदी’
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन तो किया लेकिन इसके साथ ही पार्टी में टूट के संकेत भी आने लगे हैं। पार्टी के चार में से तीन विधायक- रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी में परिवारवाद, खासकर बेटे दीपक कुशवाहा को कैबिनेट में जगह देना, असंतोष की बड़ी वजह बना।
भाजपा जहां अपनी मौजूदा संख्या (89) बढ़ाकर गठबंधन में दबदबा मजबूत करना चाहती है, वहीं जडीयू (85 सीटें) कांग्रेस विधायकों को तोड़कर बीजेपी से आगे निकलने की रणनीति पर काम कर रही है।

RCP सिंह की ‘घर वापसी’?
बिहार की राजनीतिक गलियारे से एक और बड़ी खबर आ रही है। कहा ये जा रहा है कि आरसीपी सिंह की घर वापसी हो सकती है। वो फिर जेडीयू में आएंगे। आपको बता दें कि कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी रहे आरसीपी सिंह को 2022 में जदयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। बाद में वे बीजेपी और फिर प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ से जुड़े।
हाल ही में एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार के साथ उनकी परोक्ष मौजूदगी ने जदयू में वापसी की अटकलों को तेज कर दिया है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर सीधे जातीय और सियासी समीकरणों पर पड़ेगा।
विधानसभा की वर्तमान स्थिति (2025 चुनाव परिणाम)
NDA (202)
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 89
जनता दल (यूनाइटेड) JD(U) 85
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 19
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) 05
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) 04

विपक्ष में टूट की आशंका!
महागठबंधन (35)
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) 25
कांग्रेस (INC) 06
CPI (ML) (लिबरेशन) 02
CPI (M) 01
इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) 01
विधानसभा में अन्य दलों के पास कुल 6 सीटें हैं-
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM): 5
बहुजन समाज पार्टी (BSP): 1
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के विधायकों के पाला बदलने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में भी टूट को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अगर कांग्रेस, RLM, RJD, AIMIM और BSP- इन सभी दलों से विधायकों का दलबदल होता है, तो विधानसभा का पूरा शक्ति संतुलन बदल सकता है।
तस्वीर वाकई बदलने वाली है!
भले ही एनडीए के पास फिलहाल मजबूत बहुमत हो, लेकिन घटक दलों के बीच श्रेष्ठता की लड़ाई और विपक्षी खेमे में बिखराव ने बिहार को एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह सिर्फ सियासी शोर है या बिहार विधानसभा की तस्वीर वाकई बदलने वाली है। फिलहाल ठंड में सियासी गर्मी का आनंद लीजिए।


