New Delhi: पापमोचनी एकादशी का महत्व सनातन धर्म में बहुत व्यापक है। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को उसके द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्त करता है और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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पापों से मिलेगी मुक्ति
आपको बता दें कि वर्षभर में 24 एकादशियां होती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है, इसलिए इसे “पापमोचनी” नाम दिया गया है।
आज है पापमोचनी एकादशी
वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत 25 मार्च को सुबह 05 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 26 मार्च को देर रात 03 बजकर 45 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में 25 मार्च को पापमोचनी एकादशी व्रत किया जाएगा।
क्या है महत्व?
सनातन धर्मग्रंथों के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को उसके द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्त करता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी गई है, जो अपने जीवन में शांति, सुख और आध्यात्मिक उन्नति की इच्छा रखते हैं। ‘पदमपुराण’ के अनुसार जो भी व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत करता है, वह अपने पापों का प्रायश्चित कर सकता है।
क्या है पूजा विधि?
पापमोचनी एकादशी के दिन श्रद्धालुओं को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इस व्रत में भगवान् विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है । इस दिन भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाकर पूजा प्रारंभ की जाती है। भगवान को तुलसी पत्र, पीले पुष्प, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्तजन इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकते हैं। विष्णु सहस्रनाम और भगवद्गीता का पाठ भी अत्यंत शुभ माना जाता है। और अगर ये भी नहीं कर पा रहे तो केवल राम नाम का जाप करें।कल्याण हो जाएगा।
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