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- बाढ़ से पांच बार सांसद रहे नीतीश कुमार।
- पटना जिला का अनुमंडल है बाढ़।
- पत्रकार ने भी उठाई आवाज- “जिसने आपको पहचान दी, उसे जिला का दर्जा दीजिए”
Patna,Rajesh Kumar: बिहार की राजनीति में बड़ा नाम बन चुके Nitish Kumar की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है बाढ़। यही वह क्षेत्र है जिसने उन्हें पहचान दी, राजनीति में मजबूत आधार दिया और पांच बार लोकसभा तक पहुंचाया।
लेकिन आज उसी बाढ़ की जनता के बीच एक पीड़ा और सवाल बार-बार उठ रहा है- जिस क्षेत्र ने नेता बनाया, क्या वह अब भी अपने हक से वंचित रहेगा? यह एक बेहद भावुक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा है। पटना का प्राचीन अनुमंडल बाढ़, जो नीतीश कुमार की कर्मभूमि रही और जहां से वे 5 बार सांसद बने, आज जिला बनने की पुरानी मांग को लेकर मायूस है।
नीतीश कुमार को बाढ़ ने नेता बनाया और उनके ही कार्यकाल में बाढ़ संसदीय क्षेत्र का अस्तित्व खत्म हो गया। बाढ़ के जिला न बनने का दर्द, विशेषकर जब नीतीश कुमार दो दशकों से बिहार के मुख्यमंत्री हैं और अब अपनी राजनीति की आखरी पारी में हैं तो स्थानीय लोगों में एक गहरी टीस छोड़ रहा है।
बाढ़ का ऐतिहासिक महत्व
Barh सिर्फ एक अनुमंडल नहीं, बल्कि बिहार के इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही व्यापार, शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। गंगा तट पर बसे इस इलाके की पहचान एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर के रूप में रही है। आसपास के दर्जनों प्रखंडों और सैकड़ों गांवों के लिए बाढ़ लंबे समय से प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र की भूमिका निभाता रहा है।
प्रशासनिक स्थिति
बाढ़ पटना जिले का एक प्राचीन अनुमंडल है, लेकिन समय के साथ बिहार के कई अन्य अनुमंडल जिला बन गए। इसके बावजूद Barh आज भी जिला बनने का इंतजार कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक सुविधा, विकास और क्षेत्रीय संतुलन के लिए बाढ़ को जिला घोषित करना जरूरी है।
राजनीतिक विडंबना
दिलचस्प बात यह है कि Nitish Kumar इसी क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे और केंद्र में मंत्री भी बने। पिछले करीब दो दशकों से वे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में भी राज्य की राजनीति का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में बाढ़ के लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब उनके अपने क्षेत्र का नेता राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी पर रहा, तब भी बाढ़ जिला क्यों नहीं बन पाया।

पत्रकार की पहल
इसी मुद्दे को लेकर बाढ़ के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार Rajesh Kumar भी सामने आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री Nitish Kumar से अपील करते हुए कहा कि- बाढ़ ने हमेशा उन्हें अपना नेता माना है और उनकी राजनीतिक यात्रा में इस क्षेत्र की बड़ी भूमिका रही है। साथ ही सच ये भी है कि नीतीश कुमार ने भी अपने बाढ़ और बाढ़ की जनता के लिए बहुत कुछ किया है।
मेरा कहना है कि बाढ़ सिर्फ एक अनुमंडल नहीं बल्कि ऐतिहासिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से जिला बनने की पूरी क्षमता रखता है। ऐसे में अगर बाढ़ को जिला का दर्जा दिया जाता है, तो यह इस क्षेत्र की जनता के लिए एक ऐतिहासिक फैसला होगा।
मेरा ये भी मानना है कि- “बाढ़ ने आपको पाला-पोसा, पहचान दी, रुतबा और शोहरत दी। आज जब आप विदाई की बेला में हैं, तो जाते-जाते बाढ़ को जिला बना दीजिए। यह इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा।”
विकास की उम्मीद
अगर Barh को जिला का दर्जा मिलता है, तो प्रशासनिक सुविधाएं बढ़ेंगी, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान विकसित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
अंतिम गुहार
आज बाढ़ की जनता और यहां के लोग एक स्वर में अपने प्रिय नेता से मांग कर रहे हैं- “जाते-जाते हमें हमारा हक दे दीजिए, बाढ़ को जिला बना दीजिए।” अब देखना यह है कि क्या बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar अपने राजनीतिक जीवन के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर अपनी कर्मभूमि बाढ़ को यह ऐतिहासिक तोहफा देंगे या नहीं।


