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हमारी ‘ताक़त’ सिर्फ़ इतनी है कि हमारे पास सिर्फ़ “हमारी कलम का धन” है – अभिषेक उपाध्याय 

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Img 20241004 205936जो सहा वो भी और जो किया वो भी! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब मेरा कहा-

“इस वजह से कि पत्रकार की कलम सरकार की आलोचना करती है, उस पर क्रिमिनल केस मत लादिए।”

मेरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़िए। ये आदेश हम जैसों के लिए किसी अनमोल पूँजी की तरह है। 1728054631873

सीएम योगी आदित्यनाथ को ईश्वर बताकर मेरे ख़िलाफ़ की गई एफ़आईआर में मुझे प्रोटेक्शन देते हुए और State को नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा है—

“किसी भी लोकतांत्रिक देश में विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान होना चाहिए।

संविधान के आर्टिकल 19 (1)a में पत्रकारों के अधिकारों का संरक्षण किया गया है।

“केवल इसलिए कि किसी पत्रकार की लेखनी को सरकार की आलोचना समझा जाए, उस पर क्रिमिनल केस नहीं लाद दिये जाने चाहिये।”

पिछले एक साल में मेरे ख़िलाफ़ ये दूसरी एफ़आईआर है। लखनऊ की उसी हज़रतगंज कोतवाली में। एक राजा भैया पर स्टोरी पर। दूसरी योगी आदित्यनाथ पर स्टोरी पर।

दोनों ही स्टोरियाँ एडिटोरियल ग्राउंड पर। दोनों ही स्टोरियाँ तथ्यों पर।जिनके बारे में स्टोरी है, वे भी आज तक किसी तथ्य को ख़ारिज नहीं कर सके हैं। दोनों ही स्टोरियों के एक नहीं बल्कि अनेक फॉलोअप। हर तरफ़। एक के नहीं बल्कि अनेकों के द्वारा!!

बावजूद एफ़आईआर पे एफ़आईआर, नोटिस पर नोटिस, संस्थान पर चाटुकारिता की नश्वरता के मृत्यंजयीय और शिशिर ऋतु की सत्ता जनित कंपनीयता के परा-ईश्वरीय दबाव डालने से लेकर कोतवाली में पूछताछ करने का लंबा सिलसिला!!

जो काग़ज़ों पर झेला है, वो दीखता है पर जो उसके परे है, वो….!!!!!

सुप्रीम कोर्ट का ये हस्तक्षेप मुझे और मुझ जैसे कितने ही पत्रकारों को हिम्मत देता है। उन्हें उनकी कलम की ताक़त पर ज़िंदा रहने के लिए संकल्प बद्ध करता है। लोकतंत्र में हमारी आस्था की जड़ों को गहरा करता है। हमारे भीतर के मनुष्यत्व को प्रगाढ़ करता है।

ये आदेश हमारे लिए उम्मीदों के स्वाति नक्षत्र की वो अमृतमयी बूँद है जो हमे किसी एफ़आईआर की कलम से गढ़े गए सत्ता के ईश्वरत्व के ख़िलाफ़ विद्रोह करने की शक्ति देता है।

हमारी ताक़त सिर्फ़ इतनी है कि हमारे पास सिर्फ़ हमारी कलम का धन है। कलम आप छीन नहीं सकते बाक़ी कुछ अर्जन हमने किया नहीं है। फिर हम किससे डरें और क्यों डरें?

और फिर भी जिन्हें लगता है कि पत्रकार सत्ता की मार घबरा जाएगा, उनके लिए दुष्यंत कुमार का ये शेर-

“ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा 

मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा!!”

(साभार – वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक वॉल से)

Edited by- Umashankar

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