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मुजफ्फरपुर के गरीबा गांव में युवक की संदिग्ध मौत: पीड़ित परिवार से मिले कांग्रेस नेता आदित्य पासवान, जताई हत्या की आशंका।-मुजफ्फरपुर के गरीबा गांव में युवक की संदिग्ध मौत: पीड़ित परिवार से मिले कांग्रेस नेता आदित्य पासवान, जताई हत्या की आशंका।-मुजफ्फरपुर के गरीबा गांव में युवक की संदिग्ध मौत: पीड़ित परिवार से मिले कांग्रेस नेता आदित्य पासवान, जताई हत्या की आशंका।-मुजफ्फरपुर के गरीबा गांव में युवक की संदिग्ध मौत: पीड़ित परिवार से मिले कांग्रेस नेता आदित्य पासवान, जताई हत्या की आशंका।-मुजफ्फरपुर के गरीबा गांव में युवक की संदिग्ध मौत: पीड़ित परिवार से मिले कांग्रेस नेता आदित्य पासवान, जताई हत्या की आशंका।-SC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द, संसद को ही है सूची बदलने का अधिकार।-SC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द, संसद को ही है सूची बदलने का अधिकार।-SC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द, संसद को ही है सूची बदलने का अधिकार।-SC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द, संसद को ही है सूची बदलने का अधिकार।-SC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द, संसद को ही है सूची बदलने का अधिकार।

लेखपालों के बिगड़े बोल पर आक्रोशित हुए वकील, रिश्वत खोर लेखपाल के निलंबन पर धरना दे रहे लेखपालों ने वकीलों पर की थी अमर्यादित भाषा का प्रयोग, जांच व कठोर कार्यवाई की माँग

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Img 20251104 Wa0067मऊ/ विवेक चौहान। घोसी तहसील बार एसोसिएशन और मऊ कलेक्ट्रेट के वकीलों ने उपजिलाधिकारी अशोक कुमार सिंह को जिलाधिकारी मऊ के नाम एक ज्ञापन सौंपकर लेखपाल संघ के कुछ सदस्यों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के प्रति की गई अमर्यादित एवं असंसदीय टिप्पणी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अधिवक्ता समुदाय ने इसे न्याय व्यवस्था और “ऑफिसर ऑफ द कोर्ट” के सम्मान पर सीधा आघात बताया है।

निलंबित लेखपाल के समर्थन में हुआ था धरना

गौर तलब है कि विगत दिनों रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित लेखपाल दिनेश चौहान के समर्थन में लेखपाल संघ ने तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया था। धरने के दौरान लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने भाषणबाजी में प्रशासनिक अधिकारियों, वकीलों और पत्रकारों के विरुद्ध अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी की थी। इसी घटना से अधिवक्ताओं में तीव्र आक्रोश फैल गया है, जिसे लेकर बार एसोसिएशन ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की माँग की है।

अधिवक्ताओं को बताया गया “भ्रष्टाचारी”, आक्रोश

ज्ञापन में कहा गया है कि धरने के दौरान कुछ लेखपालों ने अधिवक्ताओं को “चोर” और “भ्रष्टाचारी” कहकर अपमानित किया, जो पूरी तरह अनुचित और आपत्तिजनक है। अधिवक्ता संघ ने कहा कि इस प्रकार की भाषा न्यायिक गरिमा के विरुद्ध है और इससे अधिवक्ता समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है।

प्रशासन से जांच और कठोर कार्यवाई की माँग

तहसील बार एसोसिएशन घोसी ने जिलाधिकारी मऊ से माँग की है कि दोषी लेखपालों की पहचान कर उनके विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाई की जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो अधिवक्ता समुदाय आन्दोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

 “सत्यमेव जयते” की भावना से समझौता अस्वीकार्य — अधिवक्ता

पूर्व शासकीय अधिवक्ता दिनेश राय ने कहा कि वे हमेशा सत्य और न्याय की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं को बदनाम करने का प्रयास असहनीय है। उन्होंने कहा कि “सत्यमेव जयते” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी आस्था है। अधिवक्ताओं का अपमान, न्याय प्रणाली का अपमान है, और इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

अधिवक्ताओं ने दी आन्दोलन की चेतावनी

तहसील बार एसोसिएशन, घोसी के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार मिश्र (एड.) एवं मंत्री श्री राजेश सोनकर (एड.) ने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो अधिवक्ता समुदाय सामूहिक आन्दोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश राय, कालिकदत्त पाण्डेय, भुवेश, जय हिंद सिंह, जनार्दन यादव, अखिलेश सिंह, बाबूलाल, कैलाश, ब्रह्मदेव, सतीश, बृजेश, जय प्रकाश, उमाशंकर, नदीम, विपुल समेत बड़ी तादाद में अधिवक्ता मौजूद रहे।

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