लखनऊ। समाज में बदलाव तो हम चाहते हैं लेकिन अपना कर्म नहीं सुधारना चाहते। यह कैसे संभव है हम दूसरे से उम्मीद करें की वह हमारे साथ अच्छा व्यवहार अच्छा विचार अच्छा भाव रखे लेकिन हम शोषण पोषण और हैवानियत की नीति पर चलते रहे क्या समाज हमें नहीं देख रहा है यह भी चिंतन का विषय है। दूसरी बात समाज के अधिकांश व्यक्तियों का जीवन क्रम लक्ष्य विहीन होता है सफल व्यक्तियों को देखकर उनका मन भी वह सौभाग्य प्राप्त करने के लिए ललचता रहता है। विद्वान को देखकर विद्वान कलाकार को देखकर कलाकार बनने की ललक उठती है। कभी धनवान बनने की कभी बलवान बनने की बात सोचते रहते हैं भौकाल तथा भौकाली लोगों का जीवन देखकर उन्ही की तरह बनने की इच्छा बलवती होती जा रही है यह समाज के लिए एक अशुभ संकेत हैं। हम लोग अपना एक कोई सुनिश्चित लक्ष्य नहीं निर्धारित कर पाते। बंदर की भांतिमन भटकता रहता है। एक दिशा में झमताओं का नियोजन नहीं हो पाता। बिखराव के कारण कोई प्रयोजन पूरा नहीं हो पाता, असफलता ही हाथ लगती है। जिस तरह देशाटन के लिए नक्शा और जहाज चालक को दिशा सूचक की आवश्यकता पड़ती है, उसी प्रकार मनुष्य जीवन में लक्ष्य का निर्धारण अति आवश्यक है। क्या बनना है क्या करना है, यह बोध निरंतर बने रहने से उसी दिशा में प्रयास चलते हैं। एक कहावत है कि जो नाविक अपनी यात्रा के अंतिम बंदरगाह को नहीं जानता उसके अनुकूल हवा कभी नहीं बहती।। अर्थात समुंद्री थपेड़ों के साथ वह निरुउद्देश्य भटकता रहता है। लक्ष्मी व्यक्ति की भी वही दुर्दशा होती है। अस्तु, सर्वप्रथम आवश्यकता इस बात की है अपना एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित किया जाए।जैसे समाज दिशाहीन हुआ है उसी तरह से सरकारें भी दिशा हीन हो गई हैं ।उनका लक्ष्य युवाओं को पकोड़ा तलने तक आ गया है। अतः अब जरूरत है शिक्षा नीति में बदलाव की जीवन मैं लक्ष्य निर्धारित करने की और यह राजनीतिक दल ही कर सकते हैं अतःराजनीतिक दलों को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और इसके लिए इस देश की सबसे पुरानी और आजादी की लड़ाई लड़ने वाली और योगदान करने वाली पार्टी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। लक्ष्य के साथ अभिरुचि का होना भी आवश्यक है उसके प्रति उत्साह उमंग जगाना मन योग लगाना भी आवश्यक है। लक्ष्य के प्रति उत्साह उमंग ना हो मन योग ना जुड़ सके तो सफलता सदा संदिग्ध बनी रहेगी। मनोविज्ञान का एक सिद्धांत है की उत्साह और उमंग शक्तियों के स्त्रोत हैं। इनके अभाव में मानसिक शक्तियां पूर्ण होते हुए भी किसी काम में प्रयुक्त नहीं हो पाती। उत्साह किसी भी कार्य का प्राण है। अच्छा है इस देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने वाली जो आज काल बहुदा करते हुए नजर आती है तथा आजादी के लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली पार्टी का भी योगदान होना चाहिए शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है। शिक्षा सरल और सस्ती होनी चाहिए। शिक्षा में समाज की एकजुटता आपसी सामाजिक भाईचारा बड़प्पन की विशेष आवश्यकता है।