” अपराध को लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ के सभी दावे फेल, मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कहा था कि बदमाशों के लिए दो जगह होंगी और वे दोनो जगह नहीं जाना चाहेंगे।”

लखनऊ/ राजन भारद्वाज। उत्तर प्रदेश में अपराध चरम पर है। हत्या, लूट, बलात्कार, छिनैती और राहजनी सूबे में आम बात है। बदमाश इस तरह की संगीन वारदात को अंजाम देकर बेखौफ घूम रहे हैं। प्रदेश की ठोक दो गैंग हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मामला बस्ती जिले की है। बीते 9 अक्टूबर 2019 को आदित्य नारायण तिवारी उर्फ कबीर की गोली मार कर हत्या कर दी गई। कबीर हत्या कांड मामले में 40 दिन बाद भी खुलासा नहीं हो पाया। मृतक के परिजन 40 दिन से लगातार आमरण अनशन पर बैठे है वहीं आमरण अनशन पर बैठे परिजनों को जिले के आला अफसर अपरोक्ष रूप से धमका रहे हैं। पुलिस और प्रशासन नाकामी छुपाने के लिए पीड़ितों की ही गिरफ्तारी करने का डर दिखा रही है।

प्रसून शुक्ल, वरिष्ठ पकार

आप को बता दें कि 9 अक्टूबर 2019 की सुबह 10 बजे के आसपास आदित्य नारायण तिवारी उर्फ कबीर की गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। गोली मार कर भाग रहे 2 लोगो को जनता पकड़ कर पुलिस को दे देती है। गोली लगने के बाद कबीर को जिला अस्पताल ले जाया जाता हैं वहां से लखनऊ भेजा जाता हैं लखनऊ ले जाते हुये कप्तानगंज के पास उसने दम तोड़ दिया। उसके बाद उसे वापस बस्ती लाया गया। जहां उसके समर्थक हिंसक हो गए। उसके बाद बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी की देख-रेख में पोस्ट मार्टम और अंतिम संस्कार किया गया। दूसरे दिन से कबीर के घर नेताओं का आना चालू हो गया। कबीर के घर केबिनेट मंत्री बृजेश पाठक, स्वतंत्र प्रभार मंत्री सतीश द्विवेदी, मंत्री उपेंद्र तिवारी, जिले के विधायक के अलावा पूर्व विधायक राकेश पांडेय, विधायक खब्बू तिवारी सरीखे कई नेता परेता आये। इन लोगों ने बड़ी-बड़ी बातें की लेकिन बस्ती पुलिस कुछ नहीं कर सकी। उसके बाद बीजेपी नेता विनीत तिवारी धरने पर बैठे। बड़े-बड़े आसवासन देकर अनशन स्थगित करवाया गया और DM, SP को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। उसके बाद पुलिस मा्मले की जांच में जुट गई लेकिन जांच में कुछ भी सामने नहीं आया। कुछ दिन बाद एक अभियुक्त को लखनऊ पुलिस ने देसी असलहे के साथ गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। कबीर तिवारी की हत्या को आज 40 दिन बीत चुके हैं लेकिन जांच कार्रवाई के नाम पर योगी जी की ठोक दो गैंग का वही घिसा पिटा जवाब चांच चल रही है। वहीं 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफईआर और 2 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज है।

इस मसले वरिष्ठ पत्रकार प्रसून शुक्ल ने कहा कि बार बार इंसाफ की मांग की जा रही है, अगर 48 घंटे में हत्याकांड से पर्दा नहीं उठा तो दिल्ली से बस्ती आऊंगा, मैं भी आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा, इंतजार सिर्फ मुख्यमंत्री के दौरे का है कि इस मामले पर उनका रूख क्या है? चुप्पी बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

जब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली थी तो उन्होंने विधान सभा में में कहा था कि अपराध के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं होगी। अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी साथ ही अपराधियों को संरक्षण देने वालों की भी प्रदेश में कोई जगह नहीं होगी। ऐसे लोगों के साथ सख्ती और निर्ममता से निपटने के लिए सरकार तैयार है। साथ ही जब वो मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर पहली बाह गए थे तब उन्होंने कहा था कि यह हम लोगों ने तय किया है कि सत्त के संरक्षण में पल रहे गुंडे, माफिया, अपराधी और लुटेरे ये सब के सब मेहरबानी करके या तो उत्तर प्रदेश छोड़कर चले जाएं और अगर उत्तर प्रदेश में रहेंगे तो उनके लिए दो जगह होंगी। मुझे लगता है इन दोनो जगह कोई नहीं जाना चाहेगा। वहीं सत्ता में आने के बाद डिप्टी सीएम देनेश शर्मा ने भी कहा था कि अपराधी उत्तर प्रदेश से भागें, उत्तर प्रदेश अपराध मुक्त रहे इसके लिए पुलिस को अधिकार दिये गए हैं कि पुलिस किसी भी तरह से अपराध को पनपने ना दे। और प्रदेश के नागरिकों की रक्षा करे ये उसका दायित्व है।

यही नहीं विधान सभा चुनाव से पहले अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की जनता से कहा था कि 12 मार्च के बाद जो गुंडे प्रदेश की जनता को परेशान कर रहे हैं वो अपने आप ही प्रदेश छोड़कर चले जाएंगे। वही प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रदेश की जनता से कहा था कि उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाना है। इसके अलावा विधान सभा चुनाव से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेश की जनता से कहा था कि एक बार हमें अवसर दीजिए हम आप को विश्वास दिलाते हैं कि प्रदेश में पनपे जंगलराज को नस्तेनाबूत कर देंगे।

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या सरकारअपने वादे पर खरा उतर रही है? क्या सूबे में लोग सुरक्षित हैं? क्या कबीरे के हत्यारों को यूपी पुलिस उन दो जगहों पर भेजेगी जिसका जिक्र योगी आदित्यनाथ ने किया था?