नई दिल्ली। कर्नाटक की सरकार ने गरीब ब्राह्मण बालिकाओं को कर्मकांड से जुड़े ब्राह्मण बालकों के साथ विवाह करने पर आर्थिक मदद का ऐलान किया है। वहाँ स्थापित ब्राह्मण डेवलपमेंट बोर्ड की तरफ़ से दो योजनाएँ शुरू की गयी हैं। दूसरी तरफ़ असम की सरकार ने फ़र्ज़ी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद करने का फ़ैसला किया है। वैदिक एजुकेशन और भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए कर्नाटक सरकार का फ़ैसला स्वागत योग्य है। संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है बग़ैर संस्कृत के विकास के अन्य भारतीय भाषाओं का विकास नहीं हो सकता और ना ही भारतीय संस्कृति को बचाया जा सकता है। संस्कृत को रोज़ी रोटी से जोड़कर उसका विकास और संस्कृति की हिफ़ाज़त की जा सकती है।

ब्राह्मण तो हमेशा से संस्कृत के माध्यम से समाज संस्कृति और देश की सेवा करते रहे हैं। इसलिए ब्राह्मण के लिए शुरू की गयी योजनाएँ समाज संस्कृति और देश हित में है। तेलंगाना की सरकार ने भी पहले से गरीब ब्राह्मण के लिए वेलफेयर स्कीम चला रखी है।

ख़ास बात यह है की ब्राह्मण के ख़िलाफ़ सामाजिक आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारतीय राज्यों से हुई थी उसका नक़ल उत्तर भारत में कांशी राम ने किया था लेकिन अब बदली परिस्थितियों में दक्षिण भारत के राज्यों में वेलफेयर स्कीम चलाए जा रहे हैं। उत्तर भर के राज्यों में भी इस पर विचार किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार श्री वासिंद्र मिश्र जी के फेसबुक वॉल से साभार