नई दिल्ली, आर.कुमार:बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है। ताबड़तोड़ रैलियां हो रही हैं । इस रैलियों में हजारों लाखों की भीड़ जुट रही है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब से कुछ देर पहले कोरोना को लेकर सतर्क रहने की देश के आवाम से अपील की है, लेकिन उनकी यह अपील पूरी तरह से हास्यास्पद है!

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस चुनाव के दौरान अगर किसी व्यक्ति की कोरोना से मौत होती है तो उसकी जवाबदेही कौन लेगा?  चुनाव आयोग, प्रधानमंत्री या फिर मुख्यमंत्री या फिर राज्य के तमाम राजनीतिक दल ।पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और हम बिहार को काल के गाल में झोंक दिए हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिस तरह से राजनीतिक दलों की रैलियों में हजारों हजार की भीड़ जुट रही है वह चिंता का विषय है। अब से कुछ ही दिन के बाद प्रधानमंत्री भी सभा को संबोधित करेंगे बड़ा सवाल यह है कि उनका अपना प्रोटोकॉल है। वहींं मुख्यमंत्री महोदय का भी अपना प्रोटोकॉल है लेकिन क्या जनता के लिए कोई प्रोटोकोल है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चुनाव आयोग आंखें क्यों मूंदे हुए हैं? क्यों नहीं ऐसे नेताओं पर कार्रवाई कर रहा है? क्या चुनाव आयोग इंतजार कर रहा है बिहार में सैकड़ों मौत होने की? और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि देश का सर्वोच्च न्यायालय भी इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं?

और हद तो तब हो गई जब बिहार के उपमुख्यमंत्री माननीय सुशील कुमार मोदी जी कह रहे हैं कि बिहार में कहां है कोरोना, कोरोना को हमने हरा दिया, देखिए इस भीड़ को। अब सच कौन बोल रहा है।अब ऐसे हालात में जरूरत है बिहार की आम आवाम को सोचने की क्या इसी तरह से हम कोरोना को हरा पाएंगे और आज के संबोधन पूरी तरह से प्रधानमंत्री के संबोधन को हास्यास्पद के अलावा आप कुछ भी नहीं कह सकते।

आपको याद होगा कि जब पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर चर्चा हो रही थी लोग डरे और सहमे हुए थे तब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का हिंदुस्तान में स्वागत किया जा रहा था, और उसके बाद क्या हुआ किसी से छुपा हुआ नहीं है। बिहार में कोरोना से मंत्री, संत्री तक की मौत हो चुकी है फिर भी ना तो चुनाव आयोग को भीड़ दिख रही है ना ही हमारे राजनेताओं को। भगवान ना करे किसी को कुछ हो लेकिन अगर कुछ हुआ तो बिहार और देश आप लोगों को माफ नहीं करेगा।

कहांं है चुनाव आयोग का गाइडलाइन। याद कीजिए कुछ दिन पहले घर से बाहर निकलने पर पुलिस आम जनता को मारती थी। आज सबके सामने हजारों हजार की भीड़ बिना मास्क के इकट्ठा हो रही है। दरअसल जब सरकार और सिस्टम ही कानून तोड़े तो समझ लीजिए अच्छे दिन नहीं ही आने वाले हैं!