नई दिल्ली/ शाहिद परवेज| लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक जारी है। बैठक में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अपनी सत्ता को बचाए रखने के मुद्दे पर चर्चा हो रही है, जहां सरकार को गिराने के प्रयास जारी हैं। सूत्रों के मुताबिक बैठक में हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनावों पर भी चर्चा हो सकती है।

सीडब्ल्यूसी के 23 सदस्यों में हाल ही में हुए चुनाव में सिर्फ चार लोग- पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, गौरव गोगोई और ए. चेल्ला कुमार ही जीते हैं। लोकसभा चुनाव में हारने वाले 12 अन्य सदस्यों में वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, रघुवीर सिंह मीना, जितिन प्रसाद, दीपेंदर हुड्डा, सुष्मिता देव, के.एच. मुनियप्पा और अरुण यादव हैं। वहीं सीडब्ल्यूसी के सात सदस्यों ने लोकसभा चुनावों में भाग नहीं लिया था। पार्टी ने कांग्रेस शासित पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया है।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 52 सीटें मिलने के बाद से ही मंथन शुरू हो चुका है। यह संख्या पार्टी को पिछले लोकसभा में पार्टी को मिलीं 44 सीटों से मात्र आठ ज्यादा है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राज बब्बर, प्रचार समिति प्रमुख एच.के. पाटिल, ओडिशा पार्टी प्रमुख निरंजन पटनायक और अमेठी जिला अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने शुक्रवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।