2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए को जो अप्रत्याशित सफलता मिली है उसका अंदाजा बीजेपी को भी नहीं रहा होगा। 350 सौ से ज्यादा सीटों उस राजनीतिक दौर में मिली है जब बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए पूरा विपक्षी खेमा एक हो गया था। बीजेपी के नेताओं के भी बयान आ रहे थे कि इस बार शायद 2014 की तरह सीटें न मिले इसलिए नये सहयोगियों की आवश्यकता होगी। लेकिन एक ज्योतिष थे जिन्होंने पहले हीं यह भविष्यवाणी कर दी थी कि एनडीए को 324 से 400 के बीच में सीटें आ रही हैं और मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बन रहे हैं। . डॉ श्रीपति त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य ने कौन बनेगा प्रधानमंत्री कार्यक्रम के तहत नरेंद्र मोदी की कुंडली के आधार पर उनकी जन्मपत्रिका बनाकर 324 से 400 के बीच पूर्ण बहुमत में मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी.

इस भविष्वाणी को 26 फरवरी 2019 की सत्यता से पुनः ज्योतिष प्रेमियों के मन मस्तिष्क में ज्योतिष शास्त्र के प्रति श्रद्धा बढ़ा है. साथ ही बहुचर्चित बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से कौन विजयी होगा? यह काफी चर्चित लोकसभा क्षेत्र रहा.आपको बता दें कि कभी कांग्रेस का गढ़ रहे बेगूसराय सीट पर लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार दिवंगत सांसद भोला सिंह के रूप में कमल खिला था. बेगूसराय जिले में भाजपा के लिए भोला बाबू एक तरह से लकी चार्म भी रहे थे. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी. अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का काम केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी गिरिराज सिंह के कंधों पर होगी.दोनों नेता में एक समान बात यह रही कि इससे पहले भोला सिंह 2009 में नवादा सीट पर दर्ज की थी।वहीं 2014 में एनडीए से जदयू के बाहर आने के बाद बीजेपी ने गिरिराज सिंह को नवादा से और भोला बाबू को बेगूसराय से टिकट दी थी. दोनों नेता पार्टी की आकांक्षा पर खड़े उतरे और शानदार जीत दर्ज की.बेगूसराय जिले में परिसीमन से पूर्व दो लोकसभा क्षेत्र थे. इनमें एक बेगूसराय व दूसरा बलिया था. 2009 में परिसीमन के बाद दोनों लोकसभा क्षेत्र को मिलाकर एक सिर्फ बेगूसराय बना दिया गया. परिसीमन से पहले एक दो मौके को छोड़ दें तो बेगूसराय सीट पर कांग्रेस और बलिया सीट पर वामपंथियों का कब्जा रहा है.

2019 का लोकसभा चुनाव 2014 से अलग होने का अनुमान है. पिछले चुनाव में केंद्र सरकार की विफलता और नरेंद्र मोदी की लहर ने सभी समीकरणों को ध्वस्त कर दिए थे. इस बार पांच वर्ष के शासन काल के खिलाफ असंतोष और मतों के ध्रुवीकरण को जो प्रत्याशी रोकने में सफल होगा, जीत उसकी ही होगी. यदि ऐसा नहीं होता है तो परिणाम अप्रत्याशित होंगे.