Patna: विकलांगों खासकर खिलाड़ियों को सुविधा एवं नौकरी देने के वायदे के बावजूद आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया यद्यपि अन्य खिलाड़ियों ( जो विकलांग नहीं हैैं ) को सरकार नौकरी दे रही हैैं लेकिन विकलांग खिलाड़ियों को नहीं।

राज्य में अनेक ऐसे विकलांग खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं विदेश में भी भारत का सर ऊंचा किया है कई पदक जीते हैं लेकिन उनकी सुध नहीं ली जा रही हैैं सरकार की उपेक्षा पूर्ण नीति और उदासीनता के बावजूद अनुराग चंद्र और संतोष कुमार मिश्रा ने प्रेस वार्ता में दोनों खिलाड़ी ने बताया कि बिहार सरकार व बिहार से जुड़े लोग सहयोग करें तो अनुराग और संतोष दिव्यांग होते हुए भी पूरे दुनिया को बिना पैर के लांघ सकता हैैं।

वही संतोष एक पैर से पोलियो ग्रस्त है जो बताया की राष्टीय स्तर सहित 90 पदक कुल जीतने बाद भी आज हम जीने के लिए जब भूख मरने लगते हैैं तो अन्य प्रदेश में टेम्पु चालकर जीवन यापन कर रहा हैैं जब की जिस स्कूल से मुख्यमंत्री जी प्राथमिक शिक्षा कि वही से हम भी प्राप्त किए हैैं जबकि मुख्यमंत्री ने 2009 भी कहा था की आप मेडल लायो नौकरी मैं दुगाँ अब कितना मेडल लाए हम, इसके लिए कई बार हम बिहार सरकार सहित मुख्यमंत्री से गुहार भी लगा चुके हैैं वही विकलांग खिलाड़ी के साथ खिलाड़ी की नियुक्ति में दोहरी नीति अपना रही हैैं अभी हाल मे ही कई ऐसे स्प्रधा में खिलाड़ी की नियुक्ति हुई हैैं जो हम से राष्टीय स्तर पर मेडल कम हैैं वह विकलांग भी नहीं हैैं फिर भी समाज और सरकार कहती हैैं विकलांग के लिए विशेष प्रवधान कहाँ हैैं….

वही अनुराग जो दोनों पैर से पोलियो ग्रस्त हैैं जो बताया की राष्टीय, राज्य, प्रमडंल व जिला स्तर के सहित कुल 49 जीतने के बाद भी आज जीने के लिए दर दर के ठोकर खा कर संघर्ष कर रहे हैैं फिर भी हम दोनों ने 3rd पारा ऍड्वेंचर यात्रा कन्याकुमारी से डोकलाम ( चीन ) भाया बंगाल होते हुए बिहार की दुर्गम पहाड़ियों की यात्रा पोलारिस एटीवी गाड़ी से करने का निश्चय किया हैैं। इसके पूर्व अनुराग और संतोष ने 2015 में ट्राई साइकिल और साइकिल से इंडिया गेट से लद्दाख की यात्रा कर देश नहीं विदेश के लोगों को भी चौक आया हैैं वहीं 2017 में दानापुर कैंट से सियाचिन ग्लेशियर की दुर्गम यात्रा विकलांग मोटर बाईक से सकुसल सफल कर राष्ट्रध्वज को गौरभानवीत करते हुए अपने बिहार राज्य और देश का सर ऊचाँ कर कीर्तिमान स्थापित किया हैैं।

वही राज्य सरकार खेल सम्मान मे भी विकलांग खिलाड़ीयों के साथ दोहरी नीति करती हैैं सम्मान राशि नहीं देती हैैं जबकि अन्य प्रदेश में सभी विकलांग खिलाड़ियों को खेल में आने जाने ट्रक शूट के अलावा खेल प्रशिक्षण भी देता इसके बाद भी हम लोग जितते हैैं और उपेछा सहते हैैं। सरकार हम दोनों को वर्तमान जीने के लिए कोई विकल्प या रास्ता दे यह हम दोनों अनुरोध कर रहे हैैं।

बिहार सरकार से मदद मांगने के बाद भी कोई सहायता नहीं मिला प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से क्लब के बैनर तले बिहार सरकार और उसके अधिकारियों की कुंभकरणिय निद्रा को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो राज्य के विकलांग खिलाड़ियों को आंदोलन का रास्ता और न्यायालय के शरण में जाने के लिए बध्या होंगेेंं।