पटना/सासाराम, रंजन कुमार: बिहार बोर्ड ने आखिरकार आज मैट्रीक का रिजल्ट जारी कर दिया है। लंबे वक्त से छात्र-छात्राओं को रिजल्ट का इंतजार था जो आज खत्म हो गया है। बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा और बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने संयुक्त रूप से रिजल्ट जारी किया है। हिमांशु राज बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के टॉपर बने हैं। हिमांशु ने 96.20 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उन्हें 481 नंबर मिले हैं। वहीं समस्तीपुर के दुर्गेश को दूसरा स्थान मिला है।

दुर्गेश को 480 अंक मिले हैं। आरा के हरखेन कुमार जैन ज्ञानस्थली के छात्र शुभम कुमार तीसरे स्थान पर हैं उन्हें 478 नंबर मिले हैं। वहीं औरंगाबाद के दाउदनगर के पटेल हाई स्कूल के छात्र राजवीर और अरवल की बालिका हाई स्कूल की छात्रा जूली कुमारी संयुक्त रुप से तीसरे स्थान पर हैं. वहीं चैथे नंबर पर भी तीन छात्रों ने संयुक्त रुप से जगह बनायी है। अमरपुरा हाई स्कूल के छात्र सन्नी कुमार, अशोक हाई स्कूल दाउदनगर के मुन्ना कुमार और पटेल हाई स्कूल दाउदनगर के छात्र नवनीत कुमार ने 477 अंक हासिल किए हैं।

बिहार बोर्ड के मैट्रिक रिजल्ट जारी कर दिया गया है। इस बार मैट्रिक की परीक्षा में छात्रों का दबदबा रहा है। रोहतास के नटवार के जनता हाईस्कूल के हिमांशु राज टॉपर घोषित किए गए हैं ।बता दें कि छात्र रिजल्ट के लिए काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे। काफी लंबे इंतजार के बाद आज बिहार बोर्ड ने आज दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर मैट्रिक का रिजल्ट जारी कर दिया है। पहली बार है कि बिहार बोर्ड का रिजल्ट शिक्षा विभाग ने जारी किया है।

रोहतास के हिमांशु राज बिहार बोर्ड के मैट्रिक परीक्षा के टॉपर बने हैं. हिमांशु ने 96.20 फीसदी अंक हासिल किए हैं. उन्हें 481 नंबर मिले हैं. टॉपर बनने के बाद हिमांशु ने कहा कि कोचिंग के साथ पापा भी पढ़ाई कराते थे. घर में 14 घंटे की पढ़ाई करते थे. जिसके बाद आज वह टॉप आए है. हिमांशु ने कहा कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं. इसको लेकर वह आगे भी कड़ी मेहनत करेंगे.

किसान का बेटा हैं हिमांशु

हिमांशु ने कहा कि पापा किसान है. वह दूसरे के खेत लेकर खेती करते हैं. कई बार तो पढ़ाई के दौरान आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण परेशानी भी हुई, लेकिन किसी तरह से पढ़ाई जारी रहा.

खुद बाजार में बेचे सब्जी

हिमांशु ने कहा कि वह कई बार अपने पिता के साथ बाजार में सब्जी भी बेचा करते थे. जिससे पिता की मदद हो सके. इनके बाद वह पढ़ाई पूरे मन से पढ़ाई करते थे. यही कारण है कि आज टॉप आया हूं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है.