नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में 19 दिसंबर 2019 को यूपी के कई जिलों में उग्र प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। इस मामले में यूपी सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की प्रॉपर्टी सीज करने की बात कही थी। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूपी की योगी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें कहा कि गया था कि यूपी में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के के लिए कथित प्रदर्शनकारियों की प्रॉपर्टी सीज की जाएगी। आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश में नोटिस एक व्यक्ति के खिलाफ श्मनमाने तरीकेश् से भेजा गया, जिसकी 94 की उम्र में छह साल पहले मौत हो चुकी है। साथ ही दो अन्य को भी नोटिस भेजे गए जिनकी उम्र 90 साल से अधिक है।