सेवा में
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया/ प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री बिहार
नई दिल्ली
महाशय,
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर आपने सर्वदलीय बैठक बुलाई,नीतीश कुमार भी शिरकत कर रहे हैं।
आज तमाम टीवी चैनल,अखबार औऱ वेब चैनल की सुर्खियां है। मेरा बस ये कहना है कि क्या इस विषय को कुछ दिनों के लिए टाला नहीं जा सकता था?
1. क्या अगर आज इस विषय पर चर्चा नहीं होती तो पाकिस्तान भारत पर परमाणु हमला कर देता?
2. क्या चीन देश की राजधानी दिल्ली को अपने कब्जे में ले लेता?
3. क्या अमेरिका भारत को अपना गुलाम बना लेता?
4. या भारत देश के भूगोल से गायब हो जाता?
मैं जानता हूं मेरे ये सवाल सत्ता में बैठे लोगों को हजम नहीं होगें। आप सोच रहे होगें आखिर आज क्यों इस तरह के सवाल मैं उठा रहा हूं?
जवाब….बिहार में बच्चों की मौत। एक नहीं…कई । सैकड़ा का आंकड़ा कब को पार कर गया है और दिल्ली में आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार…मौत पर मातम मनाने के जगह एक ऐसे विषय पर बैठक कर रहे हैं जो कि अभी जरूरी नहीं था।
प्रधानमंत्री जी आप ऐसे ना थे। आपने तो अपने मन की बात कार्यक्रम में कई बार बच्चों की समस्या पर बात की थी। आज क्या हो गया। क्या आपके कानों तक बच्चों की मौत पर उनके परिजनों की चीख पुकार नहीं सुनाई दे रही है?


आप तो बड़े संवेदनशील राजनेता हैं। आज हम सब को अच्छा लगता अगर आप इस मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाते। देश के तमाम डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को मुजफ्फरपुर और आस पास के इलाकों में भेजने का निर्देश देते।
अच्छा आप क्यों ध्यान देगें? मरने दीजिए बिहारी को…ये देश की बीमारी हैं ना? क्या फर्क पड़ जाएगा सौ, हजार अगर बिहारी मर भी गया तो। कौन सी आपकी सरकार गिर जाएगी? अब तो आपको दे दिया है ना बिहारियों ने पांच साल तक अपने उपर शासन करने का अधिकार?
मुझे तरस आती है नीतीश जी के विवेक पर भी। साहब आप कम से कम तो पटना इस वक्त नहीं छोड़िये। आपको क्या लगता है कि आपके अधिकारी आपकी गैरमौजूदगी में इमानदारी से काम करते हैं? ये आपका भ्रम है? अगर ये लोग काम करते ही आज ये दिन ना तो आपको देखना पड़ता और ना ही बिहार व देश को। (मौत 1995 से हो रही है)


सर जी आपके आवास से कुछ ही दूरी पर दानापुर कैंट है, मदद लीजिए ना? पटना से लेकर दिल्ली तक तो आपकी ही सरकार है।
आपके आह्वान पर पूरा बिहार शराबबंदी के लिए घर से निकलकर मानवा श्रृंखला के लिए खड़ा हो गया था। आप प्राइवेट अस्पताल वालों से भी मदद लीजिए ना।
मैं बिहार और देश व दुनिया के उन तमाम पूंजीपतियों, सक्षम लोगों से भी अपील करूंगा कि आप अपने लोगों के लिए कुछ तो कीजिए। सर यकीन मानिए हालात बहुत खराब हैं।

अब आता हूं अपने देश के सर्वोच्य न्यायलय की संवेदनशीलता पर । मैने पिछले दिनों एक खुला पत्र लिखा और फिर माननीय साहब को टैग भी किया था। लेकिन हुआ क्या? बच्चे मरते रहे और हुजूर सोते रहे। उसमें देश के माननीय,आरदणीय और सम्मानीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अपील की थी की आप स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संज्ञान लें।
लेकिन साहब आपको भी फुरसत नहीं है। अच्छी बात है काम ज्यादा है, आप क्यों संज्ञान लेगें?
आप तो आधी रात को भी तब बैठेंगे जब कोई….. हाईप्रोफाइल मामला होगा?


सर एक बार फिर सोचिए अगर ऐसे ही हालात रहें तो आप बंद कमरे में फैसले सुनाते रहेंगे और लोग सुनेंगे नहीं। ऐसे सरकार ही आपकी नहीं सुनती है।
सर हमारे सवाल आप लोगों को बेचैन करेंगे।क्षमा चाहुंगा आपकी शांति में खलल डालने के लिए। अब भी वक्त है जागिए और बच्चों को मरने से बचाइए। वरना लोग कहेंग राम,रहीम नहीं मरा है बल्कि सिस्टम,सरकार और न्यायलय मर गया गया।
आपका विश्वासी
राजेश कुमार मिश्रा
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