लखनऊ। मऊ जिले की बेलगाम पुलिस का असली चेहरा आज उजागर हो गया । पत्रकारों को गाली देना पीड़ितों के साथ बदसलूकी करना अभद्रता करना, खुलेयाम धन उगाही करना आम बात हो गयी है। योगी सरकार की पुलिस निरोगी बनकर मनमानी के लिये कुख्यात होती जा रही है। शिकायत करने वाले को ही अपराधी साबित करना आसान हो गया है। लगातार चोरी, छिनैती, डकैती, हत्या, बलात्कार और व्यभिचार थाने के भीतर दुर्व्यवहार आम बात हो गयी है। पुलिस कप्तान के सख्त फरमान का थानों पर तैनात बहादुर दरोगाओ के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। आम आदमी तबाही की ओर बढ़ रहा है।

वहीं पुलिस थानों के कानून अपने हिसाब से चलते है उन्हीं के इशारों पर आपराधी पलते हैं जब तक चाहते है बाहर टहलते हैं जरूरत के हिसाब से थानो के मेहमान बनकर जेल के भीतर जाकर मचलते हैं।
साहब की मेहरबानी की कहानी चटखारे लेकर जेल में बताते है। आज उन्हीं बहादुरों की फौज में शामिल मऊ का मनबढ़ दरोगा पीड़ित को ही पीटने लगा फिर आव न ताव दे दना दन साहब का हिसाब किताब पूरा कर दिया फौजी ने
आज अखबारों की सुर्खियों में आ गया मऊ पुलिस का कारनामा हर तरफ फैला गया है हंगामा
किसी शायर की यह पंक्ति सच साबित हो रही है। तुझको तो हर हाल मे इसकी सजा मिलनी थी तुमने तो म ऊ मे बड़ा रंग जमा रखा था
दहशत, फजीहत , नफरत के बाद अब हिकारत भरी नजर से आम आदमी वर्दी को देखने लगा है।
वर्दी में मनमर्जी करने वालों की जमात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस पब्लिक के बीच में लगातार बढ़ रही खाई एक नये माहौल का निर्माण कर रहा है।
थाना अब कसाई खाना बनता जा रहा है। न्याय के आश व उम्मीद मे वर्दी पर भरोसा करके लोग बेखौफ थाने मे चले जाते हैं लेकिन ज्यों चहारदीवारी पार करते हैं तब उन्हे पता चलता है यहाँ तो वह दल दल जहाँ एक बार धंसने के बाद बाहर निकलना मुश्किल है। दलालों का जमघट न्याय के पनघट पर कब्जा जमाये रहता है। दरोगा वही करते हैं जो दलाल कहते हैं। बीजेपी सरकार के आने के बाद पुलिस निरंकुश हो गयी पब्लिक त्राहि त्राहि करने लगी?
हिटलर शाही शान बन गया, पीड़ितों के लिये थाना श्मशान बन गया है। कहीं लाकप में मौत कहीं अपराधियों के सह पर पर पत्रकारो की हत्या कहीं सरेयाम पुलिस वर्दी में आबरू लुटने का मामला सुनने को मिलने लगा है। जिस वर्दी को देखकर अपराधी कांपता था वही अपराधी पुलिस को ललकारता है? राजनिति के लबादे में खुलेयाम डांटता है। कहीं वही अपराधी मन्त्री बन गया तो पुलिस महकमा पीछे पीछे हांफता है। आम आदमी तो महज एक बानगी है। जब चाहे मेमना के सरीखे पुलिस दबोच ले?
दुनियां के सारे देश सैनिकों को सम्मान की नजर से देखता है। थानों, सरकारी कार्यालयों में इज्जत बख्सी जाती है। मगर भारत ही एक ऐसा देश है जहां सैनिक बे आबरू हो जाता है थानों चौकियों मे अपना परिचय देकर।

मऊ जनपद की घटना तो महज बानगी है। इसके पहले न जाने कितने सेना के अफसरान सेना के जवान थानों के भीतर बे आबरू हो चुके है। ऐसा नहीं है कि वर्दी मे जवां मर्दी नहीं ईमानदारी समझधारी नहीं है। लेकिन कुछ ही लोग महकमें को बदनाम कर दिये हैं मऊ जिले में तीन महीने के भीतर बारह लोगों की हत्या हो गयी तमाम छिनैती हो गयी ? दर्जनो अपराधी जेल भेजे गये हर घटना का खुलाशा चन्द दिनों में कर दिये जाने का रिकार्ड कायम हो गया। पुलिस के लिये खेल अपराधी और जरायम हो गया।
वह इसलिये कि ईमानदार कानून का रखवाला मऊ जैसे बिगड़ैल जिले का पुलिस कप्तान है। उनकी अलग शैली अपनी अलग पहचान है जिसके चलते पुलिस महकमा परेशान है। वरना घटनाओं का पर्दाफाश होते होते रह जाता था। होता था भी थो असली गुनाहगार सड़क पर और ईमानदार जेल के भीतर होता था। अपराधी मुस्कराता था आम आदमी रोता था।
पुलिस की शान में इजाफा करने की कोशिश को दल प्रताप सिंह जैसा निरंकुश दरोगा बदनाम कर दिया महकमे की नाक कटा दिया।
बदलता परिवेश अब जागरूक समाज का है जो आपने हक हकूक को जान रहा है पहचान रहा है। आधिकार आचार विचार पर बहस करने को हर जगह तैयार है। इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई से हालात बेकाबू होंगे समाज मे वर्दी बदनाम होगी।
निश्चित रूप से दल प्रताप सिंह जैसे मनबढ़ दरोगा पर अंकुश लगाया जाना चाहिए नहीं तो आने वाले कल में सामाजिक समरसता कानून की विबसता के आगे लाचार हो जायेगी ? लोगों के भीतर से वर्दी का भय समाप्त हो जायेगा। हर तरफ निरंकुसता का माहौल बन जायेगा। हालांकि जिले के लोग देख रहे हैं कि ईमानदार तेज तर्रार पुलिस कप्तान क्या कार्रवाई करते हैं। महकमें को क्या नसीहत देते हैं।

साभार – जगदीश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार