अयोध्या, पवन उपाध्याय : कांचीपुरम जगतगुरु शंकराचार्य पीठ का इस राम भूमिपूजन का बहुत ही खास योगदान है। श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने आज बकुल की लकड़ी से बने इस पात्र (शंकु) की पूजा की है। इस लंबे से पात्र में जो अंदर जगह है, उसमें कोषाध्यक्ष ने सोना-चांदी और नौ रत्न से इसे भरा है। ये प्रक्रिया आज विधिवत अयोध्या के कांचीपुरम आश्रम में की गई। पांच अगस्त को राम मंदिर भूमिपूजन के लिए जो जमीन में गड्ढा किया जाएगा, उसके मूल में इसी बकुल के शंकु को रखा जाएगा और उसके ऊपर ही प्रधानमंत्री सारी पूजा और समर्पण करेंगे। दरअसल अयोध्या सप्तपुरियों में प्रथम और कांची मध्य में है। दोनों का एक सनातन वैदिक नाता है। इसी लिहाज से जब राम मंदिर के भूमि पूजन के बात शुरु हुई तो कांचीपुरम पीठ के शंकराचार्य जी ने ट्रस्ट से संपर्क कर इस विधिविधान की चर्चा की। शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज ने राम जन्मभूमि आंदोलन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका थी। संयोग से 5 अगस्त को जयेन्द्र सरस्वती महाराज का हिंदू तिथि-नक्षत्र से जन्मदिन है। जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज ने एक बार ये भी कहा था कि जब अयोध्या में कांची का अयोध्या आश्रम बनकर तैयार होगा, तभी मंदिर का निर्माण शुरू होगा।

कांची पीठ ने पांच सौ साल बाद संपन्न हुए इस विवाद के बाद वैदिक मान्यताओं और जानकारी के अनुसार भूमिपूजन कैसे हो और क्या-क्या विधान निभाए जाएं, सबकी जानकारी निकाली और उसी अनुसार तैयारी करके सभी सामग्री भेजी। सारे मूल अनुष्ठान के लिए तैयारी उनके आदेश के अनुसार ही किया गया है। न्यास और संबंधित व्यक्तियों को सारी जानकारी दी। बकुल की लकड़ी के इस शंकु के बराबर ही भूमि में जगह बनाई गई है, जिस पर प्रधानमंत्री नाग-नागिन का जोड़ा, चांदी की ईंट, पावन जल और कई चीजें रखकर पूजा करेंगे। 32 सेकेंड (मुहूर्त) में प्रधानमंत्री से पूर्णाहुति करवाई जाएगी, जो “करिष्यामि” कहने से संपन्न होगा।

इस खास पात्र के अलावा सोने-चांदी के अभिमंत्रित श्रीयंत्र, राम जी का पूरा जीवन और इस विवाद का पूरा विवरण भी अंकित करवाकर भेजा गया है। रोचक ये भी है बकुल का ये शंकु ऊपर से श्रीयंत्र जैसा ही दिखता है। कांची शंकराचार्य महाराज ने सभी अतिथियों के लिए चांदी का एक सिक्का भी भेजा है।