नई दिल्ली/रांची,आर.कुमार/उमाशंकर: झारखंड कांग्रेस का कलह दिल्ली पहुंचा। और जैसा की उम्मीद था वैसा ही हुआ। तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच यथास्थिति बनाये रखने के निर्देश दे दिये गये। और हर दोनों गुट को कह दिया गया कि सार्वजनिक रूप से कोई बयान बाजी नहीं की जाए।


शनिवार को हुई महत्वापूर्ण बैठक में झारखंड के 36 नेता दिल्ली पहुंचे थे।नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के समक्ष तमाम नेताओं ने अपनी बातें रखीं। झारखंड में चुनाव की घोषणा में अधिक से अधिक दो महीने बाकी हैं और इसी कारण से राष्ट्रीय नेतृत्व परिवर्तन की बातों को फिलहाल स्वीकार नहीं कर रहा है। पूरी संभावना है कि झारखंड कांग्रेस की टीम जस की तस बनी रहेगी। अब इस बाबत 11 अगस्त् को दिल्लीत में होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति में फैसला लिया जाएगा।


झारखंड प्रदेश कांग्रेस की पहली बैठक हुई जिसमें राष्ट्रीय महामंत्री केसी वेणुगोपाल, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह, सह प्रभारी उमंग सिंघार आदि मौजूद थे।


इस बीच खबर है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, फुरकान अंसारी, ददई दुबे, प्रदीप बलमुचु आदि नेता अपले-अपने स्तर से केंद्रीय नेताओं के संपर्क में हैं और दोनों अपने तर्कों के साथ बातों को रख रहे हैं।

डॉ. अजय कुमार से तमाम वरीय नेता और पूर्व मंत्री इनसे नाराज चल रहे हैं। सुबोधकांत सहाय ने तो मोर्चा खोल ही दिया है, रामेश्वर उरांव, ददई दुबे, राजेंद्र सिंह, प्रदीप बलमुचु आदि पुराने नेता इनका विरोध कर रहे हैं। प्रदेश के पांच में से तीन जोनल कोऑर्डिनेटर भी इनके विरोध में हैं। पुराने नेताओं में सुखदेव भगत, आलमगीर आलम समेत चंद ऐसे नेता भी हैं जो दोनों गुटों से बराबर दूरी रखे हुए हैं। दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस की टीम और जिलाध्यक्षों का भारी-भरकम सपोर्ट डॉ. अजय कुमार को है।


अब सवाल उठता है कि क्या आलाकमान के कह देने से झारखंड कांग्रेस का कलह समाप्त हो गया है। बिल्कुल नहीं, ये तय मानिए की चुनाव आते-आते कांग्रेसे के कई नेता बीजेपी में जाएंगे और आने वाले दिनों में कांग्रेस और कमजोर होगी। सच्चाई ये है कि कांग्रेस आलाकमान अभी खुद अपने आप को अस्थिर कर रखा है तो वो क्या प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ताओं को निर्देश देगा। राहुल अभी मानने को तैयार नहीं हैं।