नई दिल्ली:आर्थिक मंदी की आहट अब स्पष्ट सुनाई के साथ-साथ दिखने लगी है। देश के कई सेक्टर में कारोबारी ग्रोथ दो दशक के निचले स्तर पर है।

अब इसका असर कंस्ट्रक्शन उद्योग व रियल इस्टेट के कारोबार में दिखने लगा है।और अगर इस पर सरकार समय रहते ध्यान नहीं देती है तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

बेरोजगारी पर पहले से घिरी मोदी सरकार के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। जानकारों का कहना है कि मंदी के चपटे में आई रियल एस्टेट से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से करोड़ो लोग जुड़े हैं।वर्ष 2013 के बाद से सरकार की अदुर्दशी नीति की वजह से आज ये हालात पैदा हो गये हैं। उदाहरण के लिए नियमों के पेच, तो कभी बालू और अन्य संसाधनों की कमी से उत्पन्न हालात ने इस क्षेत्र के कारोबारियों की कमर तोड़ रखी है।बिहार के जाने माने रियल एस्टेट कारोबारी और गृह वाटिका के मालिक जो कि एक फिल्म स्टार और गायक भी हैं कहते हैं कि “अगर बिहार की बात की जाए तो 2005 के दौर में जो राज्य की 13 फीसदी विकास दर थी उसमें रियल एस्टेट का अकेल 5 फीसदी योगदान था।

आज की तारीख में यह घट कर 3 फीसदी से नीचे है। हालात चिंताजनक हैं। ऐसे में सरकार अगर आर्थिक सहयोग नहीं करती है तो, हर घर के सपने को पूरा होने में बाधा उत्पन्न होगी। ऐसे मुझे लगता है कि जिस तरह से पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं उससे एक नई आशा जगी है।“

सूत्रों की माने तो अगले सप्ताह में घर खरीदारों और रियल ऐस्टेट डेवलपर्स के लिए पैकेज की घोषणा की जा सकती है। वहीं यह इंडस्ट्री अब सरकार से मांग और तरलता बढ़ाने के लिए विनियामक और टैक्स बदलावों की मांग कर रही है।आपको बता दें कि हाल ही में निर्मला सीतारमण और शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाउसिंग इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है, जिसमें इंडस्ट्री की मौजूदा हालत के बारे में चर्चा की गई थी।जिसके बाद ऐसा माना जा रहा हैं कि केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर से मंदी को कम करने और निर्यात बढ़ाने के लिए पैकेज देने की तैयारी कर ली है।
जो कदम उठाए जाएंगे, उनमें ठप पड़े प्रोजेक्ट्स को चिन्हित कर उन्हें फिर से शुरू करने के लिए टास्क फोर्स का गठन, ब्याज के मानदंडों को सरल बनाने, एक नई रेंटल हाउसिंग पॉलिसी…किफायती आवास कैटेगरी की सीमा बढ़ाने और हाउसिंग के लिए आंशिक गारंटी योजना के अंदर एप्लीकेशन प्रोसेस में लगने वाले समय कम करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। कहा ये जा रहा है कि बहुत जल्द सरकार इसकी घोषणा करने वाली है।