नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार पवन सिंह की फिल्म “जय हिंद” सिनेमाघर के पर्दे पर आ गई है, लेकिन छा गई ये कहना अभी जल्दबाजी होगी।

रिलीज से पहले ये दावा किया गया था कि इसकी कहानी एकदम ताजा तरीन होगी। वादा ये भी किया गया था कि यह फिल्म देश भक्ति के चाशनी में डूबी नायाब पिक्चर होगी। यही वजह रहा कि इसको स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले रिलीज किया गया।

फिल्म में एक इंडियन ऑटो ड्राइवर (पवन सिंह) को एक पाकिस्तानी लड़की से प्रेम होते दिखाया गया है। पाकिस्तानी लड़की रुख्सार (मधु शर्मा) भारत में गलती से आ जाती है और अपना यादाश्त खो बैठती है।


आप अगर इस फिल्म को देखेंगे तो आपको सनी देओल की फिल्म ‘गदर’ और सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ से प्रेरित नजर आएगी। और यही इस फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष है। किसी भी फिल्म की कहानी सबसे ज्यादा मायने रखती है।

यहां जब दर्शक सिनेमा हॉल के अंदर जाता है और कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है दर्शक को ‘गदर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ के आगोश में ले लेती है। दर्शक सनी देओल के ‘गदर’ और सलमान के ‘बजरंगी भाईजान’ स्केल पर फिल्म को देखने लगते हैं। जोकि इस फिल्म में संभव नहीं दिखता।


हालांकि फिल्म् ‘जय हिंद’ पवन सिंह की अब तक की सबसे बड़ी बजट की फिल्म मानी जा रही है। इस फिल्म में पाकिस्तानी विलेन के रोल में मीर सरवर हैं। मीर सरवर इससे पहले अक्षय कुमार के साथ फिल्म केसरी में भी थे। अभिनय के मामले में मीर सरवर ने शानदार प्रदर्शन किया है।


जहां तक पवन सिंह का सवाल है तो वो इस फ़िल्म में अपने किरदार के साथ न्याय करते नजर आये हैं। उनका अभिनय,एक्शन और नृत्य में सामंजस्य है। लेकिन वो भी क्या कर सकत हैं जब कहानी ही कार्बन कॉपी हो तो!

मधु शर्मा राधा और रुख्सार के रोल में फिट बैठी हैं। संजय पांडे, आकांक्षा अवस्थीे, प्रियंका पंडित, संजय पांडेय के अलावा संजय वर्मा, धामा वर्मा, ब्रिजेश त्रिपाठी ने भी काम ठीक किया है।


गीत-संगीत भी ठीक बन पड़ा है। संगीत निर्देशन छोटे बाबा का है और गीत राजेश मिश्रा, पंकज तिवारी, गोविंद ओझा, विवेक बक्शीे, सुमित चंद्रवंशी, शेखर मधुर का है. इसमें रोमांटिक, सैड, डांसिंग नंबर के साथ कव्वाली भी डाला गया है। देशभक्ति के कितने गीत हैं पता ही है। फिल्मांकन भी बेहतर है।


निर्देशन में फिरोज खान ने अपना योगदान दिया है। और हां कहानी भी इनकी ही है। फिल्म का स्क्रीनप्ले भी उन्होंने राकेश त्रिपाठी, एस.ए. के साथ मिलकर लिखा है।

लेकिन जो उम्मीद की जा रही थी कि फिल्म की कहानी नई होगी, वो नहीं है। कोई भी दर्शक इसे ‘गदर’ और ‘बजरंगी भाईजान’ का कार्बन कॉपी कहने से परहेज नहीं करेगा।

ये दुर्भाग्य की बात है कि हमारे भोजपुरी फिल्म के राइटर,निर्माता,निर्देशक और कलाकार हिंदी व साउथ की फिल्मों से बाहर कोई प्लॉट तलाश नहीं कर पा रहे हैं।

यहीं कारण है कि इस तरह की फिल्म देखकर बाहर आने पर दर्शक अपने आपको ठगा महसूस करता है।
हां दाद देनी होगी फिल्मआ का निर्माताओं को जो इस तरह की कहानी पर अपना पैसा लगाते हैं।

ऐसे निर्माण अभय सिन्हान, प्रशांत जम्मू वाला, अपर्णा साह, विशाल गुरानी और समीर आफताब ने संयुक्तण रूप से किया है। हां अगर वक्त गुजारने के लिए या पुरानी फिल्मों की घीसी-पीटी कहानी के शौकीन हैं तो फिल्म देख सकते हैं। ‘जय हिंद’