नई दिल्ली,आर.कुमार: भारत ने जम्मू-कश्मीर मे धारा 370 क्या हटाई पाकिस्तान की जमीन खिसक गई है। हाल-बे-हाल है। एक तो पहले से ही कंगाली के दौर से गुजर रहा ‘नापाक’ अब अपने हाथों अपनी कबर खोदने को उतावला है।

बेचैनी में वहां के पीएम इमरान खान ने कुछ कदम उटाये हैं।एक फिर से एयरस्पेस को बंद करना।दुसरा भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को खत्म करना।और तीसरा भारत के साथ राजनयिक संबंधों को डाउनग्रेड करना।

अब जरा भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था समझिए-

जीडीपी

भारत की जीडीपी करीब-करीब 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत इस वर्ष ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारत ने पिछले वर्ष फ्रांस को पछाड़कर छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किया है। पाकिस्तान की इकॉनमी बेहाल है। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की जीडीपी 2597.49 अरब डॉलर यानी 184806.22 अरब रुपये जबकि उसी अवधि पाकिस्तान की जीडीपी 304.95 अरब डॉलर यानी 21696.58 अरब रुपये की थी।

विदेशी मुद्रा भंडार

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था आंकने का सबसे बेहतर पैमाना है।इस मामले में भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से बहुत आगे है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली वेबसाइट ट्रेडिंगइकनॉमिक्स.कॉम के मुताबिक, पाकिस्तान के पास दिसंबर 2018 तक 13752.90 मिलियन डॉलर यानी 97,915 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा भंडार था जबकि 15 फरवरी 2019 तक भारत के पास 398270 मिलियन डॉलर यानी 28,35,543 करोड़ रुपये का भंडार था।

आयात-निर्यात

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, 2017-18 में पाकिस्तान ने 25 खरब 55 अरब, 4 करोड़, 33 लाख पाकिस्तानी रुपये मूल्य के निर्यात किए जबकि 66 खरब, 94 अरब, 89 करोड़, 67 लाख पाकिस्तानी रुपये मूल्य के आयात किए। यानी, कुल 41 खरब, 28 अरब, 96 करोड़, 45 लाख पाकिस्तानी रुपये मूल्या का व्यापार घाटा हुआ।


विशेषज्ञों की माने तो भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को निलंबित करने से पाकिस्तान को भारी नुकसान होगा। क्योंकि पाकिस्तान भारत से कई आवश्यक वस्तुओं का आयात करता है। इस साल फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले के बाद व्यापार संबंधों में तनाव के चलते भारत से पाकिस्तान को होने वाले निर्यात में पहले ही कमी आयी है। पाकिस्तान को ये भी समझना चाहिए कि भारत इस मामले में उस पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है जबकि पाकिस्तान की भारत पर निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक है।


पाकिस्तान कौन-कौन से सामान भारत भेजता है।
ताज़े फल, सीमेंट और चमड़े के सामान। पाकिस्तान के इन ताजे फलों का एक बड़ा बाजार भारत में है। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में 89.62 मिलियन डॉलर यानि 63 करोड़ के फल भारत ने खरीदे। इसके अलावे सेंधा नमक, सल्फर, पत्थर, चूना,मुल्तानी मिट्टी, सीमेंट और मेडिकल उपकरण भी पाकिस्तान से भारत में आते हैं।


किसको नुकसान होगा?
हमने आपको दोनो देश के जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार से अवगत करा दिया है। अब सवाल उठता है कि आखिर इन उत्पादित सामानों को कहां खपाएगा पाकिस्तान? औऱ अगर निर्यात नहीं हुआ तो फिर इसके उत्पादक क्या करेंगे? एक तो पहले से ही खास्ता हाल पाक की अर्थव्यस्था अब खुद अपने ही चाल से मरेगा।


अब याद कीजिए-
जब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उन्हें सरकारी खर्चों में कटौती और राजस्व उगाही के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की कारों और वहां की भैसों को बेचना पड़ा था। बात यहीं खत्म नहीं होती है एक और बानगी देखिए।


गधे के सहारे चल रही अर्थव्यवस्था
पाक मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पाकिस्तान सरकार को गधे बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था का खर्च जुटाना पड़ रहा है। पाक गधा विकास कार्यक्रम के तहत गधों की एक फौज तैयार कर रहा है। इसमें पाकिस्तान ने एक अरब डॉलर का निवेश किया गया है। पाक ऐसा कर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में चल रहे इस कार्यक्रम के जरिए चीनी निवेशकों को आकषिर्त करने की योजना है। ताकि वो पाक में ज्यादा से ज्याद निवेश करें और पाक की अर्थव्यवस्था पटरी पर वापस आ सके। अब आपलोग खुद ही सोचिए ये क्या लड़ेगा भारत से? “गधा कहीं का”