रचनात्मक,विचारवान और नवन्मेष शिक्षा के द्वारा ही भारत जैसे देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।युवाओं के हेड्स और हैंड को रचनात्मक और ऊर्जावान बनाकर ही उनके व्यक्तिव को निखारा जा सकता है।उक्त बातें शिक्षक शिक्षा केन्द्र, केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ वाराणसी एवं शिक्षा, संस्कृति उत्थान न्यास, काशी प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एकदिवसीय वेबिनार”नई शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत”विषय पर बोलते हुए प्रो.नवांग समतेन, कुलपति, केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ वाराणसी ने कही।

कार्यक्रम में मुम्बई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.संजय देशमुख ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में बच्चों को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रिय भाषाओं के द्वारा ज्ञानार्जन का अवसर मिलेगा।यह शिक्षा नीति शिक्षा को लिबरल बनाने पर जोर देती है।प्रो.आर पी तिवारी , कुलपति, पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने कहा कि यह शिक्षा नीति इक्सपेरीमेंटल लर्निंग पर जोर देती है।इस विधि से कठिन से कठिन विषयों को समझने में आसानी होगी।यह शिक्षा नीति हमारे सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को देखते हुए तैयार की गई है।हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति समाजिक, आर्थिक और वंचितों लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षक शिक्षा केन्द्र के निदेशक डॉ हिमांशु पाण्डेय जी ने सार वक्तव्य रखा। डा.रमेश सिंह ने सबका धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन डा.बृजेश शर्मा ने किया।प्रस्तुत वेबिनार में मार्गदर्शन डॉ पुणेन्दु कुमार मिश्र का मिला। स्वागत डॉ इन्द्रजीत सिंह ने किया। डॉ सुशील कुमार सिंह, अमित मिश्रा व अन्य लोगों ने भाग लिया।