नई दिल्ली,उमाशंकर: भारत में अब तक जो CAA और NRC व NPR को लेकर सड़क से संसद तक हंगाम खड़ा कर रह थे। उनको ये खबर जरूर पढ़नी चाहिए। अब तक जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को भी भारत में नागरिकता देने की मांग पर खुन खराबा मचा रहे थे उन्हें एक बार फिर सोचना चाहिए।

आइए अब आपको बताते हैं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर कैसे कहर बरपाया जा रहा है। ताजा मामला शुक्रवार का है। ननकाना साबिब में सैकड़ों कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सिखों के पवित्र धर्मस्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेरकर पथराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सिखों को भगाने और ननकाना साहिब का नाम बदलने की धमकी भी दी। जिसका वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है।

घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी नाराजगी जाहिर की उसके बाद पाकिस्तानी सरकार ने हस्तक्षेप किया। इमरान सरकार के अफसरों ने प्रदर्शनकारियों से समझौता कर गुरुद्वारे के बाहर से भीड़ हटाई और 35 सिख श्रद्धालुओं को सही सलामत बाहर निकाला।

अब आप ये भी जान लीजिए की करतारपुर कॉरिडोर के उद्धाटन (9 नवंबर) से चार दिन पहले ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी जगजीत कौर को मो. हसन नाम के मुस्लिम युवक ने अगवा कर लिया था। धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कर लिया था। तब लड़की के पिता ने करतारपुर में धरना देने की चेतावनी दी थी। इसके चलते पुलिस ने लड़की को वापस पिता के पास भिजवा दिया था। मुस्लिम लड़का बड़े घर का है। बाद में कुछ लोगों ने उसकी ताकत पर सवाल उठाए। कहा कि कैसे बंदे हो जो लड़की चली गई। इसके बाद उस युवक ने दोबारा लड़की को अगवा कर लिया।

विरोध में सिखों ने प्रदर्शन किया, जिसे स्थानीय मुसलमानों ने समुदाय के खिलाफ मान लिया। इसी वजह से गुरुद्वारा साहिब पर पथराव किया गया। पंजाब प्रांत के एक मंत्री ने फोन कर पुलिस को मौके से सिखों को निकालने के लिए कहा, तब जाकर पुलिस पहुंची।

अब सवाल उठता है कि इमरान कब तक झुठ बोलते रहेंगे कि पाकिस्तान में हिन्दु,सिख और अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार नहीं हो रहा है। आज की तारीख में पूरी दुनिया यह मान रही है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं लेकिन अफसोस यह है कि यहां के सियासतदानों को ये सब नहीं दिखता।