New Delhi: इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों में से एक है हज। इस्लाम के मानने वालों का कहना है कि हर मुस्लिम को जीवन में एक बार हज पर जाना चाहिए। इसी वजह से हज यात्रा का इतना महत्व होता है। लेकिन आज की तारीख में सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की नीतियों के कारण दुनिया भर के लाखों मुसमलान इस साल हज का बहिष्कार कर रहे हैं।

हज का बहिष्कार करने वाले मुसलमानों का कहना है कि यह सही है कि हज इस्लाम की बुनियादी इबादतों में से एक है, लेकिन जब कोई अत्याचारी शासक उससे होने वाली आय और पहचान को निर्दोष मुसलमानों के जनसंहार पर ख़र्च करे तो हमारा कर्तव्य है कि हम उसे इससे रोकने का प्रयास करें।
अमरीकी पत्रिका फ़ॉरेन पॉलिसी ने अपनी एक रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि सऊदी अरब में मानवाधिकारों के उल्लंघन, यमन युद्ध और पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या जैसी घटनाओं से दुनिया भर के मुसलमानों में गहरी चिंता पाई जाती है।प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी सैन्य गठबंधन के हमलों में अब तक 60 हज़ार से अधिक यमनी नागरिक मारे जा चुके हैं।

पिछले अप्रैल को लीबिया के ग्रांड मुफ़्ती सादिक़ अल-ग़रीमी ने मुसमलानों से अपील की थी कि वह तीर्थयात्रा के लिए इस बार से अधिक सऊदी अरब की यात्रा न करें। मुफ़्ती अलग़रीमी का कहना था कि हज से होने वाली आय को सऊदी शासन मुसलमानों के दमन के लिए इस्तेमाल कर रहा है।फ़ॉरेन पॉलिसी का कहना है कि ग़रीमी पहले प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान नहीं हैं कि जिन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में तीर्थयात्रा के लिए सऊदी अरब नहीं जाने की अपील की हो।

सुन्नी मौलवी और सऊदी अरब के प्रखर आलोचक युसूफ अल-काराडावी ने अगस्त महीने में फतवा जारी किया था जिसमें हज की मनाही की गई थी। इस फतवे में कहा गया था कि भूखे को खाना खिलाना, बीमार का इलाज करवाना और बेघर को शरण देना अल्लाह की नजर में हज पर पैसा बहाने से ज्यादा अच्छा काम है।