New Delhi, Umashankar: व्यापार विश्वास के कच्चे धागे पर टिका होता है। इतिहास गवाह है कि पटना के व्यापारियों का दुसरे प्रदेश और विदेश से व्यवसाय होते रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में गुजरात के एक कपड़ा व्यापारी राजेश कुमार कि वजह से आज की तारीख में अब पटना के कपड़ा व्यवसायी गुजरात की जगह अन्य राज्यों से अपना व्यवसाय करने पर विचार करने लगे हैं। अगर ऐसा हुआ तो गुजरात के कपड़ा बाजार को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

अब आइए आपको बताते हैं कि किस तरह सूरत के कपड़ा व्यापारी राजेश कुमार ने पटना के पटेल नगर स्थित प्रसिद्ध मामा-भांजा कपड़े की दुकान के मालिक दीपक कुमार के साथ छल किया है। दरअसल 2017 में दीपक कुमार ने अपने व्यवसाय हेतु सूरत के व्यवसायी राजेश कुमार से संपर्क किया। शुरुआती दौर में राजेश कुमार ने कई तरह के प्रलोभन दिये। इस दौरान दीपक कुमार से सिक्योरिटी के नाम पर एक ब्लैंक चेक लिया गया।


कुछ दिनों तक तो सब ठीक-ठाक चलता रहा । लेकिन कालांतर में दीपक कुमार ने बिना ऑर्डर डैमेज और आउटडेटेड कपड़े राजेश कुमार को सपलाई करनी शुरू कर दी। इस सप्लाई से हतप्रभ दीपक कुमार ने तत्काल इसका विरोध जताया। लेकिन राजेश कुमार के असहयोगात्मक रवैया की वजह से दीपक कुमार को काफी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं राजेश कुमार ने इनके साथ व्यापार करने से इंकार कर दिया। इस बीच राजेश कुमार ने ना तो माल वापस लिया और ना ही कोई सकारात्मक रवैया अपनाया। बल्कि ठीक इसके विपरीत बिना बताये साजिश के तहत सिक्योरिटी चेक को बैंक में डालकर बाउंस करा दिया। साथ ही सलावतपुर थाना सूरत में एक झुठा केस दर्ज करा दिया।


अब अन्यासा उपजे हालात से दीपक कुमार एवं उनका परिवार आज की तारीख में मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान और अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है। आपको बतादें कि राजेश कुमार सूरत के बड़े कपड़ा व्यापारियों में से एक हैं। अब राजेश कुमार अपने इन्हीं रसूख का इस्तेमाल करते हुए दस लाख रुपये देने के लिए दीपक कुमार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि कपड़ा व्यापारी राजेश कुमार की इन करतूतों की वजह से वर्षो की बिहार और गुजरात के व्यापारियों के बीच बने व्यसायिक संबंधो पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।