दिल्ली:अमर सिंह

रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की स्टडी में इस बात का खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के कई निजी अस्पताल एमआरपी में हेराफेरी कर दवाओं, सीरिंज और दूसरे मेडिकल उपकरणों पर मनमानी तरीके से मुनाफा कमा रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ये अस्पताल अपनी ‘सेवाओं’ के लिए भी मोटी रकम वसूलते हैं। एनपीपीए ने फोर्टिस समेत दिल्ली-एनसीआर के 4 बड़े और नामी अस्पतालों पर स्टडी करके ये रिपोर्ट तैयार की है। जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई है। साथ ही एनपीपीए ने यह रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर भी जारी की है।
एनपीपीए ने बताया कि हाल के दिनों में चार मरीजों ने अलग-अलग अस्पतालों पर ज्यादा चार्ज करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद इन अस्पतालों के बिलों की समीक्षा की गई। इसमें पता चला कि एक अस्पताल ने ऑपरेशन के दौरान 1200 ग्लव्स खराब होने की बात कहते हुए एक मरीज से 11,400 रुपये वसूल लिए। मरीज के बिल में एक ग्लव्स की कीमत करीब 10 रुपये रखी गई, जबकि अस्पताल ने इस ग्लव्स को महज डेढ़ रुपये में खरीदा है।
ऐसे ही एक अस्पताल ने ब्लड चढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कैनुला को दो रुपये में खरीद कर मरीजों से करीब 1500 रुपये इसके लिए वसूला गया। जांच के नाम पर भी मरीजों से अच्छी-खासी कीमत वसूली गई, जिसमें सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच शामिल है। दिल्ली में जहां एमआरआई के लिए सामान्य डायग्नोस्टिक सेंटर महज दो हजार रुपये वसूलते हैं वहीं एक अस्पताल ने प्रति एमआरआई मरीज से 10 हजार रुपये लिए हैं।
फिलहाल जहां एक ओर केंद्र सरकार 10 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा देने की योजना शुरू करने जा रही है वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों से की लूट की जा रही है, यह चौंकाने वाला मामला है। देखना होगा कि एनपीपीए की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इसको लेकर क्या कदम उठाती हैं। क्योंकि यह एक बार नहीं कई बार मामला सामने आता रहता है कि अस्पतालों में किस-किस तरह के तरीके लूटखसोट के निजी अस्पताल अपनाते रहते हैं. यहाँ तक कि मरने के बाद वेंटीलेटर पर रखे रहने तक का आरोप भी लगता रहता है.