लखनऊ, दीपक : किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की जांच और उनके इलाज की रणनीति बदल दी है। अब इंफेक्टेड पेशेंट की दो से तीन दिन में जांच नहीं बल्कि चार से पांच दिन बाद जांच कराई जाएगी।

केजीएमयू में सात कोरोना इंफेक्टेड पेशेंट भर्ती हैं। इन मरीजों की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। सभी सात मरीजों की ज्यादातर जांचों में कोविड-19 वायरस नहीं मिल रहा है। अब सिर्फ लार व नाक के पानी की जांच में ही वायरस मिल रहा है।
केजीएमयू के डॉक्टर्स के मुताबिक अभी संक्रमित मरीजों की जांच दो से तीन दिन में कराई जा रही थी। पर, इलाज के दौरान यह देखा गया है कि इतने कम दिनों में वायरस मरीज के शरीर में मिलता ही है। लिहाजा अब मरीज की सेहत के अनुसार चार से पांच दिन में ही जांच कराई जाएगी।

कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टर्स ने बताया कि इस बीमारी में मलेरिया की दवा कारगर साबित हो रही है। मलेरिया की दो तरह की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं। इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जिन मरीजों में मलेरिया की दवा बेअसर होगी उन पर एचआईवी की दवा अजमाई जाएगी।

डॉ. डी. हिमांशु, इंचार्ज आईसीयू, गांधी वार्ड, केजीएमयू

डॉक्टर्स के मुताबिक कोरोना संक्रमित पहली महिला डॉक्टर मरीज को 11 मार्च को भर्ती किया था। आठ दिन के इलाज के बाद महिला डॉक्टर को डिस्चार्ज कर दिया गया था। उधर, एक मरीज का इलाज 19 दिन से चल रहा है। 10 दिन तो सभी मरीज अस्पताल में गुजार चुके हैं। अब किसी भी मरीज के यूरीन (पेशाब) व स्टूल (मल) जांच में वायरस नहीं मिला है।
डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक कुछ मरीजों में आठ से 10 दिन में वायरस खत्म या फिर कम होते हैं तो किसी में 14 से 18 दिन में। कुछ मरीजों में 22 से 28 दिन तक शरीर में वायरस मौजूद रहते हैं। वह कैरियर स्टेज में होते हैं। यानी शांत अवस्था में पड़े होते हैं। जब तक वायरस पूरी तरह से शरीर से न चले जाएं तब तक उन्हें छोड़ा नहीं जा रहा है।