मथुरा, मदन सारस्वत : पांच अगस्त यानी आज जब मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में भूमि पूजन के समारोह से गुंजायमान हो रही होगी उसी समय मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित केशवदेव मंदिर में भगवान केशवदेव राम रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।

ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है कि मथुरा में यदि कान्हा ने जन्म लिया तो अपने सच्चे भक्त तुलसीदास की मांग पर उन्होंने यहां पर राम रूप में उन्हें दर्शन दिये थे।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी जब भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए मथुरा आए तो ठाकुरजी ”बंशी लकुट काछनी काछे। मुकुट माथ भाल उर आहे” स्वरूप में भगवान श्रीकेशवदेव जी के दर्शन कर गोस्वामी जी भाव-विभोर हो गये और उन्होंने पुनः प्रार्थना की कि ”का बरनऊ छवि आप की, भले बने होै नाथ, तुलसी मस्तक तब नवै, धनुष बाण लेऊ हाथ”।

उस समय गोस्वामी तुलसीदास की प्रार्थना पर भगवान श्रीकेशवदेव ने धनुष-बाण धारण कर मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के रूप में उन्हे अलौकिक दर्शन दिये थे। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वभौम राजा भगवान श्रीराम की पुण्य जन्मभूमि श्रीअयोध्या धाम में भगवान श्रीराम मंदिर के निर्माण का शुभारम्भ भारत की सनातन संस्कृति में निहित विश्व कल्याण के भाव को पुष्ट करेगा। देव-देवाधिदेव-महादेव भी जिस तिथि की प्रतीक्षा कर रहे थे, ऐसे दिव्य श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की तिथि करोड़ों सनातन धर्मावलम्बियों के लिए परमानन्द का दिवस है।

कपिल शर्मा ने कहा कि इस पावन अवसर पर संपूर्ण जन्मभूमि मंदिर प्रांगण एक प्रकार से नई नवेली दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। केशवदेव मंदिर में केसरिया ध्वज, बन्दनवार, तोरण आदि लगाये जायेंगे। अयोध्या में आयोजित कार्यक्रमों के अनुरूप श्रीकृष्ण-जन्मभूमि पर भी कार्यक्रम आज से शुरू हो गए हैं जो 5 अगस्त को भूमि पूजन के समापन तक चलेंगे। उन्होंने बताया कि आज श्रीकृष्ण’जन्मस्थान पर विराजित अति प्राचीन श्रीअन्नपूर्णेश्वर महादेव का भव्य पूजन-अभिषेक शास्त्रोक्त विधि से किया गया। श्रीअन्नपूर्णेश्वर महादेव का भव्य सौन्दर्यीकरण हाल ही में श्रीकृष्ण-संकीर्तन मण्डल, जन्मस्थान के उदार आर्थिक सहयोग से कराया गया है ।

राम मन्दिर पूजन के अभिजित मुहूर्त में जिस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूजन करेंगे, उस पुण्य घड़ी में श्रीकृष्ण-जन्मस्थान पर आरती का आयोजन किया जायेगा। भगवान की आरती के साथ ही संपूर्ण मंदिर परिसर ढोल-नगाड़े, घण्टे-घड़ियाल, मृदंग-झांझ, मंजीरों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान हो उठेगा।