मऊ। सूबे में मुख्यमंत्री का पद संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में सड़कें गड्ढा मुक्त होंगी। लेकिन जिले में कई सड़कें गड्ढा युक्त हैं। आलम ये है कि अगर बीमार व्यक्ति इन सड़कों पर हो कर अस्पताल जाना चाहे तो वो रास्ते में ही दम तोड़ देगा।

सड़कों का जायजा लेने आल इंडिया जर्नलिस्ट यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ आनंद के पांडेय मऊ आए। उन्होंने यहां की गड्ढा युक्त सड़कों को देख कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। जब वो जिले के खण्डेरायपुर बगली पिजड़ा पहुंचे तो सड़क की दुर्गति देख आग बबूला हो गया। बीजेपी नेता अनिल पांडेय ने बताया कि मऊ रानीपुर पलिया होते हुए इस रास्ते से तमाम अधिकारी आते जाते हैं। लेकिन उनका ध्यान सड़क पर नहीं होता।
डॉ आनंद के पांडेय से स्थानीय निवासी मिथिलेश द्विवेदी ने बताया कि इस बाबत उत्तर प्रदेश की जनसुनवाई ऐप के जरिए उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई थी। विभागीय जांच के बाद शिकायत को यह कह कर निस्तारित कर दिया गया कि इस शिकायत में , पता स्पष्ट नहीं लिखा था। उसके बाद उन्होंने फिर से साफ साफ पता लिखकर जन सुनवाई के जरिए पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उसके बाद इस शिकायत को विभाग ने यह कह कर निस्तारित कर दिया कि यह सड़क जिला पंचायत मऊ से नहीं बनी।

अब सवाल ये है कि इस सड़क को जिला पंचायत ने नहीं बनाया, मऊ PWD ने नहीं बनाया, प्रधानों ने नहीं बनाया तो आखिर कार इस सड़क को किसने बनाया?

हालांकि पूरा गांव यह कह रहा है कि इस सड़क को जिला पंचायत मऊ के कोटे से बनाया गया है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी जी जनता की सुविधा के लिए जन सुनवाई पोर्टल पर समाधान कि बात करते हैं लेकिन सरकार के विकास की धज्जियां विभाग ही उड़ा रहा है अब जनता के लिए जनसुनवाई ऐप का कोई मतलब नहीं है। जिसके चलते ग्रामीणों में विभाग की लापरवाही के प्रति आक्रोश व्याप्त है। विभाग और कर्मचारियों ने ऐप का मजाक बनाकर रख दिया है। इस बाबत आल इंडिया जर्नलिस्ट यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ आनंद के पांडेय ने मुख्यमंत्री, ग्राम्य विकास मंत्री से संज्ञान लेकर कार्यवाही करने की मांग की है।