जालन्धर। मानव तन सहित सम्पूर्ण सृष्टि पंचतत्वों से बनी है। गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में “क्षिति जल पावक गगन समीरा, पंचरचित यह मनुज शरीरा” कहकर इसका माहात्म्य गाया है। ये सभी तत्व जहाँ भी होते हैं और जहाँ कहीं भी जाते हैं, सजातीय तत्व की ओर बढ़ते हैं और अपने

मूल में समाकर ही पूर्णता को प्राप्त करते हैं। अग्नि सूर्य की ओर लपकती है, जल समुद्र की ओर दौड़ता है, धूल का कण आसमान की ओर बढ़ जाने पर भी वापस मिट्टी में समाता है, इसी तरह हवा और आकाश भी वापस आकर अपनी-अपनी मूल धुरी में ही समाहित हो जाते हैं।

यह बात आज पूर्वांहकाल औद्योगिकनगरी जालन्धर के साईं दास स्कूल प्रांगण में हज़ारों ज्ञान-जिज्ञासुओं के बीच बोलते हुए विश्व जागृति मिशन, आनन्दधाम, नयी दिल्ली के प्रमुख सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि पंचतत्वों की भाँति मानव काया को चलाने वाली ‘आत्मा’ जब तक अपने मूल स्रोत ‘परमात्मा’ से नहीं मिल पाती,तब तक वह असंतुष्ट रहती है, अपूर्ण बनी रहती है। मनुष्य की चेतना परमचेतना से, महतचेतना मिले बिना कहीं भी और कभी भी चैन नहीं पाती। सन्तश्री ने कहा कि इस लौकिक संसार में आनन्द की झलक मात्र मिल सकती है, आनन्द की पूर्णता आत्मतत्व के परमात्मतत्व में विसर्जित हो जाने में ही है और यह पूर्णता इसी मानव जीवन में ही पायी जा सकती है।

श्री सुधांशु जी महाराज ने प्रभु प्राप्ति का राजमार्ग ‘आत्मसाधना’ अर्थात् जीवन साधना को बताया और कहा कि साधना के साथ ‘सेवा’ को जोड़कर ही यह मज़बूत व सुदृढ़ राजमार्ग विनिर्मित होता है। भक्तराज हनुमान को साधना और सेवा का महानतम पुजारी बताते हुए उन्होंने सुख-दुःख, लाभ-हानि, रात-दिन, गर्मी-शीत, सूखा-बरसात, काला-सफ़ेद, मीठा-नमकीन आदि की तरह साधना एवं सेवा के बीच पूर्ण सन्तुलन स्थापित करने के आध्यात्मिक सूत्र उपस्थित नर-नारियों को दिए। उन्होंने भीतर के द्वन्द को छोड़कर स्पष्टता के राजपथ को अपनाने की सलाह दी तथा इसके लिए अपने जीवन को सच्ची आध्यात्मिकता से जोड़ने का आह्वान किया।

सत्संग समारोह में भारी संख्या में मौजूद ध्यान-जिज्ञासुओं ने सुधांशु महाराज से ध्यान की क्रियाएँ सीखीं। योग के सूक्ष्म आसनों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ सभी ने आन्तरिक जागरण करने में समर्थ ‘ध्यान’ की गहरी अवस्थाओं के बारे में जाना। जालन्धर सहित पंजाब के विभिन्न अंचलों से पधारे हज़ारों लोग ध्यान कक्षा में भावविभोर दिखे। सभी ने मुट्ठी भरे हाथ उठाकर सीखे गये ज्ञान को अपने जीवन में उतारने और उसका लाभ परिवार व समाज के अधिकाधिक
लोगों तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।

युगऋषि आयुर्वेद अभियान के सीएओ श्री के.के.जैन आज जालन्धर पहुँचे और उन्होंने मानवमात्र को सेहतमंद बनाने में समर्थ १७२ युगऋषि उत्पादों के बारे में जानकारी दी। सत्संग समारोह का संचालन विश्व जागृति मिशन के निदेशक एवं प्रवक्ता श्री राम महेश मिश्र ने किया।