नई दिल्ली,जी.कृष्ण: आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जारी दिशा निर्देश में कुछ और बाते जोड़ी है। कोर्ट ने उमीदवारों पर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी अखबारों और सोशल मीडिया पर भी जानकारी डालने के लिए कहा है। अगर राजनीतिक पार्टी ऐसा नही करती है तो चुनाव आयोग इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दे। बता दें कि वर्ष 2018 के सितंबर माह में 5 जजों की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह गंभीर अपराध में शामिल लोगों के चुनाव लड़ने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कानून बनाए।

वहीं, इसके बाद भाजपा नेता और पेशे से वकील अश्विनी उपाध्याय ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिए कोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले छह महीने में कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया।वकील अश्विनी की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने भारत सरकार के कैबिनेट सचिव और विधि सचिव से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने 25 सितंबर 2018 को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि- नामांकन करते समय प्रत्येक उम्मीदवार उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी बोल्ड अक्षर में देगा।


– किसी राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ने वाला कैंडिडेट अपनी पार्टी को उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी देगा।
– राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी होगी कि वह प्रत्येक कैंडिडेट के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी पार्टी की वेबसाइट पर डाले।
– चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट और राजनीतिक दलों की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अखबार और न्यूज़ चैनल्स में अपने / अपने उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में जानकारी प्रकाशित कराएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश दिया था कि यह सूचना नामांकन होने के बाद कम से कम तीन बार प्रकाशित करायी जाएगी। गौरतलब है कि उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड और संपत्ति आदि का ब्योरा मीडिया में प्रकाशित प्रचारित करने के आदेश पर अमल न होने का मुद्दा उठाने वाली दूसरी अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। कोर्ट ने उपाध्याय की अवमानना याचिका में उठाए गए मामले को गंभीर बताते हुए तीन चुनाव उपायुक्तों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा था।