मऊ। एक रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया के देशों में ग्लोबल हंगर ट्रैकिंग ने मंगलवार को भारत के संबंध में चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। इसके मुताबिक भारत विश्व के उन 117 देशों में 102वें नंबर पर आ गया है जहां बच्चों की लंबाई के अनुसार वजन नहीं है, बाल मृत्यु दर ज्यादा है और बच्चे कुपोषित हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) 2019 में कहा गया कि बच्चों को इस तरह से नुकसान पहुंचने का आंकड़ा 20.8 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया कि विश्व में बच्चों के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन यमन, जिबूती और भारत का रहा जिनका फीसदी 17.9 से 20.8 के बीच है।

GHI में कहा गया कि भारत में 6 से 23 महीने की बीच के उम्र के महज 9.6 बच्चों को ही ‘न्यूयनतम स्वीकार्य आहार’ दिया जाता है। रिपोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा साल 2016-18 के बीच कराए गए एक सर्वे के आधार पर बताया कि भारत में 35 फीसदी बच्चे छोटे कद के हैं जबकि 17 फीसदी बच्चे कमजोर पाए गए।

उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (CNNS) ने देश भर में 19 साल तक के 112,000 बच्चों का आकलन किया था, जिसमें पाया गया कि कुपोषण में कमी के उपायों में प्रगति हुई है।

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के मुताबिक साल 2016-18 में CNNS के आंकड़ों और GHI की आकंड़ों की तुलना करें तो भारत में बाल कुपोषण का स्तर कम है।ग्लोबल हंगर इंडेक्स का मतलब उन देशों से जहां बच्चे पेटभर खाना नहीं खा पा रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और GHI में उसका स्थान दक्षिण एशिया के देशों से भी नीचे हैं। इसका मतलब है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से भी पीछे हैं जिनकी रैंकिंग क्रमश: 94, 88, 73 और 66 है।साल 2010 में भारत लिस्ट में 95वें नंबर था जो 2019 में खिसकर 102वें स्थान पर आ गया। साल 2000 की 113 देशों की सूची में भार का स्थान 83वां था। रैंकिंग में बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत टॉप पर हैं।

2013 के मुकाबले कुपोषण में भारत बहुत से गरीब तरीन मुल्कों से भी आगे बढ़ गया है, इसका मतलब ये होता है कि 2014 से सरकारी विभागों में भ्र्ष्टाचार और सरकारी लापरवाही में इज़ाफ़ा हुआ है।मैं मऊ में देखता हूँ कि गरीब बुनकर परिवारों के बच्चे लम्बाई और वजन में उन बच्चों से काफी पीछे हैं जिनका परिवार सम्पन्न है। इससे ये साबित होता है कि सरकार की कोई सुविधा स्वास्थ्य के छेत्र में नही है। प्रधानमंत्री जी को पाकिस्तान के बात बन्द करके इन मुद्दों पर विचार करना चाहिये, अन्यथा देश वासियों को नरक में ढकेलकर कभी बेहतर भविष्य की कामना नही की जासकती है।

लेखक अरशद जमाल मऊ नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन हैं।