नोए़डा: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही भ्रष्टाचार रोकने का दावा करे लेकिन स्वास्थ महकमा सुधरने का नाम नहीं ले रहा। प्रदेशभर में मरीजों को अस्पतालों से निःशुल्क दवाएं दिए जाने की व्यवस्था है। लेकिन ज्यादातर डाक्टर बाहर की कमीशन वाली दवाएं सरकारी पर्ची के साथ एक छोटी पर्ची पर लिख कर मालामाल हो रहे हैं।

दरअसल यूपी सरकार ने सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क इलाज करने की घोषणा की है । मरीजों को सरकारी अस्पतालों से ही दवाएं दिए जाने का निर्देश दिया है । लेकिन सरकारी चिकित्सक हैं कि वे सरकारी फरमान को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

राजकीय चिकित्सा केंद्र के आयुष विभाग में होमियोपैथ के चिकित्सकों द्वारा मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। चिकित्सक मरीजों के तीमारदारों का दोहन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

सीएचसी पर आये मरीजों को एक रूपये की पर्ची लेकर जब चिकित्सक के पास जाता है तो चिकित्सक उस पर कुछ जांचें और दवा का नाम लिख देते हैं साथ ही बाहर मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली कमीशन की दवाओं को एक छोटी पर्ची पर लिखते हैं। जिससे मजबूरी में मरीजों के तीमारदार बाहर की दवा खरीदते हैं।

इलाज के लिए आये गौरव (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उसे गर्दन पर सिस्ट है और पिछले 7 माह से नोएडा के राजकीय चिकित्सालय के आयुष विभाग में इलाज करा रहा है। डॉक्टर साहब ने कहा कि ये बहुत खतरनाक रोग है, यह रोग सरकारी दवाओं से ठीक नहीं होगा। यदि ठीक होना है तो सामने राम मेडिकल स्टोर है। उससे दवा लाकर दिखाकर तब खाना, एक कागज पर लिखकर दे दिया। करीब 7 महीने में 14 हजार की दवा खाने के बाद भी सिस्ट ठीक नहीं हुआ।

इसके अलावा नोएडा निवासी 24 वर्षीय शंकर बताते हैं कि उन्हें गैस और इनिशियल स्टेज पर पाइल्स है। वे पिछले 5 महीने से इलाज करा रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुए। एक दिन इलाज के दौरान डॉक्टर ने उन्हें भी छोटी पर्ची पर कुछ दवाएं लिखकर थमा दिया और बताया कि राम मेडिकल पर मिलेंगी। करीब तीन महीने में 6 हजार की दवा खाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ।

दवा वितरक विश्वनाथ बताते हैं सरकार ने आयुष विभाग ने 1 रुपए की पर्ची पर मुफ्त दवाई देने के लिए हर अस्पताल में डॉक्टर बैठा दिए हैं लेकिन दवा की कमी है। पिछले कई महीनों से दवाएं नहीं आ रही हैं। कम दवा में काम चलाया जा रहा है। यही नहीं दवा बांटने के लिए शीशियां तक खत्म हो चुकी हैं कागज की पर्ची में दवा देना पड़ रहा है।

मामले में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनुराग भार्गव से बात की तो वही रटा रटाया जवाब मिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया मामला गम्भीर है। जांच करवा कर कार्यवाही करेंगे।