New Delhi: बैसाख शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को अक्षय करने बाली चीजों को संवर्धन करने की परंपरा है।और सबसे बड़ा धन स्वास्थ्य को अक्षय बनाने के लिए प्रभु के प्रति समर्पण का पर्व है।कालांतर में इस पर्व को महंगी वस्तु खरीदने की परंपरा प्रारम्भ हुआ है।कोरोना महामारी और लॉक डाउन के बीच बाजार बंद रहेंगे।इस बीच ज्योतिष साधक दीपक मिश्रा ने कहा कि अपने पूजा के स्थान पर दीप प्रज्ज्वलित करके अपनी मन को एकाग्र करके श्रीं का जाप करें।दीपक के अनुसार पेड़ पौधे का रोपण और पौधों के पोषण का संकल्प लेना चाहिये।साथ ही श्री सूक्त व पुरुष सूक्त का पाठ करना श्रेषयकर माना जाता है।

तुलसी महालक्ष्मी स्वरूपा हैं।जहां भगवान श्री विष्णु शालिग्राम के रूप में निवास करते है।इसवर्ष अक्षय तृतीया चूंकि रविबार को पड़ रहा है,इसलिए तुलसी के पौढ़े को स्पर्श किये वगैर दिये दिखाना चाहिए।
अक्षय तृतीया के दिन किये गए दान व धर्म अक्षुण्ण रहता है।बदलते हुए परिस्थितियों में दीपक मिश्रा ने कहा कि अपने नजदीक के जरूरतमंद सम्वन्धी या गुरुजनों तक अनाज गुप्त रूप से देना,इस वर्ष के अक्षय तृतीया की सार्थकता सिद्ध होगी।दीपक न कह की सबसे बड़ा धन निरोगी काया है।पूरे विश्व का हर मानव अक्षय रहे,इसके लिए स्वास्थ्य की कामना से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिये।

दीपक ने कहा कि इस वर्ष चूँकिख़रीदारी नही हो पायेगा,इसलिए पांच सुपारी हल्दी से रंग कर अपने तिजोरी में रख दें।इससे भी खरीदारी का फल प्राप्त होता है।चूंकि बैसाख मास में धरती में तपन होती है,इसलिए मिट्टी के पात्र में जल दान का महत्व है लेकिन इस वर्ष ऐसे दान से बचना चाहिए।अक्षय तृतीया के दिन भगवान श्रीपरसुराम का भी जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।जो भगवान के अंशावतार थे।लेकिन उन्हें अहंकार हो गया था।बाद में जनकपुरी में श्री राम जी ने उनके अहंकार को तोड़कर अपनी विनम्रता से उन्हें मोहित कर आशीर्वाद पाया था।।इसलिए श्री परशुराम के अहंकार का नाश होने के कारण परशुराम के जन्मदिवस को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है।और प्रार्थना विनती,आरोग्यता,सौभग्य के साथ यशस्वी को अक्षय बनाने के लिए यह पर्व भारतीय जनमानस को आकर्षित करता है।