नई दिल्ली, उमाशंकर: चंद्रयान-2 का सफलता पूर्वक प्रक्षेपण कर भारतीय स्पेस संस्थान (Isro) ने आज एक नाया इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अभियान पर पैनी निगाह रखे हुए थे और अपने ऑफिस से इस लॉन्चिंग को लाइव देख रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण भारतीय वैज्ञानिकों के कौशल और विज्ञान के क्षेत्र में नयी ऊंचाइयां छूने के लिए 130 करोड़ देशवासियों के दृढ़ संकल्प को प्रकट करता है। सिलसिलेवार ट्वीट में उन्होंने कहा कि आज हर भारतीय गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया गया। अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई है। करीब 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू करेगा।

चंद्रयान-2 के कुल तीन मुख्य हिस्से हैं। पहला हिस्सा ऑर्बिटर है। चांद की सतह के नजदीक पहुंचने के बाद चंद्रयान चांद के साउथ पोल की सतह पर उतरेगा। इस प्रक्रिया में 4 दिन लगेंगे। चांद की सतह के नजदीक पहुंचने पर लैंडर (विक्रम) अपनी कक्षा बदलेगा। फिर वह सतह की उस जगह को स्कैन करेगा जहां उसे उतरना है। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और आखिर में चांद की सतह पर उतर जाएगा।

दूसरा लैंडर। लैंडिंग के बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर (प्रज्ञान) को रिलीज करेगा। रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा। फिर यह वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा। इसके 15 मिनट के अंदर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी।

तीसरा हिस्सा है रोवर, जिसे प्रज्ञान नाम दिया गया है। 27 किलोग्राम का यह रोवर 6 पहिए वाला एक रोबॉट वाहन है। इसका नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब ‘ज्ञान’ होता है।
लॉन्च के कुल 52 दिनों बाद चांद पर होगा रोवर, 14 दिनों तक रहेगा ऐक्टिव

अलग-अलग चरणों के तहत लॉन्च के 52 दिनों बाद (16+5+27+4) चंद्रयान चांद की सतह पर पहुंच जाएगा। चांद की सतह पर पहुंचने के बाद लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) 14 दिनों तक ऐक्टिव रहेंगे। रोवर इस दौरान 1 सेंटीमीटर/सेकंड की गति से चांद की सतह पर चलेगा और उसके तत्वों की स्टडी करेगा व तस्वीरें भेजेगा।

वह वहां 14 दिनों में कुल 500 मीटर कवर करेगा। दूसरी तरफ, ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर उसकी परिक्रमा करता रहेगा। ऑर्बिटर वहां 1 साल तक ऐक्टिव रहेगा ।Chandrayaan-2 के सफल लॉन्चिंग पर SPOT TV की ओर से इसरो को ढेर सारी शुभकामनाएं।