नई दिल्ली,आर.कुमार: ये काला हीरा (कोयला) है बाबू…जिसने भी इसमें हाथ डाला उसके जूते के नोक पर होती है डायमंड। लेकिन इससे भी की कोई इंकार नहीं कर सकता है कि कोयला न जाने कितनों के दामन को काला कर दिया है। आज हम आपको SPOT TV के जरिए एक बड़ा खुलासा करने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे कि कैसे कोयला के अवैध कारोबारियों का साम्राज्य एक नहीं कई राज्यों में फैला है। बात सबसे पहले पश्चिम बंगाल की।

देश की कोयला राजधानी के नाम से चर्चित धनबाद कभी हीरा उगलती थी सारे बड़े माफिया यहीं से अपना साम्राज्य संचालित करते थे। लेकिन अवैध कारोबारियों ने अपना ठिकाना बंगाल (कोलकाता) को बना लिया है। इसकी वजह नाम ना छापने की शर्त पर लोग बताते हैं कि यहां बड़ा बाजारा है। यहां से देश के किसी भी कोने में मूव करना आसान रहता है। यहां दूसरे प्रदेश के बड़े अवैध कारोबारी भी अपना ठिकाना बना रखे हैं। साथ ही यहां शराब,शबाब और कबाबा के इंतजामात आसानी से उपलबद्ध है।

अब आप ये भी जान लीजिए कि बंगाल-झारखंड का अवैध कोयला कहां-कहां जाता है। बिहार में सबसे बड़ी मंडी है डेहरी मंडी और उत्तर प्रदेश में वाराणसी जहां बड़े पैमाने पर अवैध कोयला पहुंचता है। इसके अलावा पंश्चिम बंगाल के अवैध कोयले को गिरिडीह, गोविन्दपुर,निरसा, बरवाअड्डा, हजारीबाग, पटना, नवादा, नालंदा, औरंगाबाद,आरा समते कई शहरों के ईट भट्ठे में भी झोंका जा रहा है। अब ये भी जान लीजिए कि इस अवैध कोयले का यह कारोबार प्रतिदिन 3 से 5 करोड़ रुपये का है। इस खेल में नेता से लेकर लोकल लिंक और कुछ पुलिसवालों के सहयोग से यह काला कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा।

अब जरा ये भी जान लीजिए कि इस कारोबार में कौन-कौन से लोग शामिल हैं। सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि इस खेल में कोलवरी क्षेत्र के सत्ता पक्ष और विपक्ष के राजनेता हैं और उनके संरक्षण में बंगाल का लाला और इसके अलावे बंगाल के गजेन्द्र सिंह, अवध शर्मा, अल्ला राखा, जगदीश तिवारी, विशाल मांझी, उपेन्द्र बर्णवाल और मैथन के जोगेन्द्र राय आदि शामिल हैं। ये तो कुछ नाम हैं इसके अलावे इनके तार झारखंड के कई सफेदपोश से भी जुड़े हैं जिनका संरक्षण सत्ता से प्राप्त है। या यों कहें कि सत्ता संरक्षित अवैध कोयले का कारोबार चल रहा है।

अब हम आपको इसका रुट बताते हैं। पहला रास्ता वीरभूम – दुमका और भागलपुर होते हुए बिहार के ईट भट्ठे और डेहरी मंडी तक कोयला पहुंचता है। दूसरा रास्ता बंगाल के रानीगंज से पुरुलिया-चांडिल-रांची-रामगढ़ और हजारीबाग के रास्ते वाराणसी और डेहरी मंडी तक और तीसरा रास्ता निरसा, डुमरी, बगोदर होते हुए जाता है। अब ऐसा नहीं है कि ये प्रमानेंट रास्ता है सच्चाई ये है कि कोयला माफिया समय-समय पर इन रास्तों को चेंज करते रहते हैं। यों तो पुलिस को सब पता है ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि रास्ते मे पड़ने वाले हर नाका और थाना का हिस्सा फिक्स है। लेकिन दिखावे के लिए पुलिस कभी-कभी अवैध कोयला लदे ट्रक को जप्त कर लेती है लेकिन इससे कोयला माफिया के कारोबार पर कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि इसकी क्षतिपूर्ति अगले ट्रिप में कर दी जाती है।

ताजा जानकारी आपको दे दें कि पश्चिम बंगाल के रानीगंज में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन व कोयला चोरी का काम बेरोक-टोक अभी चल रहा है, इसके अलावा बांकुड़ा जिले के मेजिया अर्थग्राम में भी बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खदान चल रहा है। यहां से सभी कोयला रानीगंज होते हुए ही निकलते हैं। बंगाल का अवैध कोयला वाराणसी और डेहरी के मंडी में डिस्को पेपर (पेड) के माध्यम से खपाया जा रहा है। अब आप ये भी जान लीजिए कि यह मंडी अवैध कोयला खपाने का सबसे बड़ा सेंटर है।

अब ये जान लीजिए कि डिस्को पेपर यानि पेड क्या है । आपको बता दें कि जिस तरह वैध कोयला ले जाने के लिए ईसीएल द्वारा चालान दिया जाता है। उसी प्रकार अवैध कोयला ले जाने के लिए डिस्को पेपर (पेड) चलता है। बंगाल में अवैध कोयला ले जाने के लिए डिस्को पेपर की प्रथा ममता बनर्जी के पहले कार्यकाल में रोक दी गयी थी, लेकिन ममता बनर्जी के दूसरे कार्यकाल में यह फिर से शुरू हो गया है। आखिर क्यों? आप खुद समझदार हैं माजरा तो समझ में आ ही गया होगा। अंदर की खबर ये है कि कोलियरी क्षेत्र से जुड़े कुछ बड़े नाम यह पेड जारी करते हैं। इस तस्करी में जय मां काली, जय मां दुर्गा आदि नाम से डिस्को पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। जिन गाड़ियों के पास पेड या पास होता है, उसे अन्य किसी भी परमिट की जरूरत नहीं होती है। बंगाल सीमा तक ट्रक पहुंचाने के डिस्को पेपर की कीमत 91 हजार रुपए है। वहीं झारखंड सीमा से मंडी तक ट्रक पहुंचाने के लिए एक पेड की कीमत 65 हजार रुपये है। हर थाना व ओपी से गुजरने पर चालक डिस्को पेपर दिखाता है और उसे हरी झंडी देकर पास कर दिया जाता है।
क्या रेट है अवैध कोयले का ?

बंगाल के अवैध कोयले का रेट प्रति टन 2300 से 2600 रुपये के बीच है। जिसमें से 1400 रुपये प्रतिटन पेड (डिस्को पेपर) का लगता है। इसमें सांसद,विधायक, माफिया, पत्रकार और पुलिस को मैनेज किया जाता है। इसके अलावे सीमा पार कराने वाला प्रतिटन 500 रुपये लेता है। इस खेल में थाना, वरीय पुलिस अधिकारी, आरटीओ को भी मैनेज किया जाता है। अब बताते हैं कि बंगाल के अवैध कोयले को बिहार और यूपी की मंडी में 10,000 से लेकर 12,000 रुपये प्रति टन बेचा जाता है। पश्चिम बंगाल के रानीगंज से झारखंड के रास्ते मंडी भेजे जाने वाले अवैध कोयला लदे ट्रकों में ओवर लोड रहता है। ट्रकों पर लगभग 35 टन कोयला लोड रहता है। वहीं सभी ट्रकों को तिरपाल से ढक दिया जाता है और बंगाल का अवैध कोयला झारखंड के रास्ते यूपी और बिहार की मंडियों में खपाया जाता है। अब ऐसा नहीं है कि ये सब इतना आसान है। आपको याद होगा धनबाद के अवैध कोयला कारोबार में दर्जनों हत्या की कहानी। यहां अक्सर काला हीरा के लिए रक्त बहता है। सच्चाई ये है कि हमाम में सभी नंगे हैं।