नई दिल्ली,जी.कृष्ण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक खत्म हो गई है। इस बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर और नरेंद्र तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के दी।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए बड़े फैसले:
‘कृषि लागत और मूल्य आयोग को लेकर सुझाव आए थे, उसे मंजूर कर दिया गया है।’
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को अमल में लाया गया है। कृषि लागत और मूल्य आयोग की 14 फसलों के लिए सिफारिश आ गई है।
किसानों को राहत देने के लिए 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 50- 83% की वृद्धि:
देश में इस बार बंपर पैदावार हुआ है, अबतक 95 लाख मीट्रिक तक धान और 360 लाख मीट्रिक टन गेंहू खरीदा जा चुका है
‘किसानों ने बंपर पैदावार कर देश को समर्पित किया है। आज तक गेहूं की खरीद 360 लाख मिट्रिक टन हो चुकी है। दलहन और तिलहन की खरीद चल रही है।’
‘MSME के लिए 50,000 करोड़ की इक्विटी का प्रस्ताव पहली बार आया है। इससे संकट में फंसे छोटे उद्योगों को मदद मिलेगी।’
जावड़ेकर ने कहा कि 20 करोड़ महिलाओं के खाते में सीधे आर्थिक मदद पहुंचाई गई।


आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत एमएसएमई की परिभाषा को बदलने की मंजूदी दी गई है।
20 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान संकट में पड़े एमएमएमई के लिए किया गया।
शहरी और आवास मंत्रालय ने रेहड़ी पटरी वालों के लिए विशेष लोन की व्यवस्था की है। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। 10 हजार तक का लोन दिया जाएगा।
एमएसपी को डेढ़ गुणा ज्यादा करने का वादा सरकार पूरा कर रही है। तीन लाख रुपए तक के लोन पर भुगतान की अंतिम तारीख 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है। किसानों को दी गई छूट के बाद चार प्रतिशत पर लोन मिलेगा।
विशेष सूक्ष्म ऋण योजना शुरू की जा रही है। इस योजना से 50 लाख रेहड़ी पटरी वालों को लाभ मिलेगा
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कुल लागत का डेढ़ गुना रखने का वादा सरकार पूरा कर रही है। 14 फसलों पर किसानों को लागत से 50 फीसदी से 83 फीसदी ज्यादा कीमत मिलेगी। खेती और उस जुड़े काम के लिए 3 लाख तक के अल्पकालिक कर्ज के भुगतान की तिथि 31 अगस्त 2020 तक बढ़ाई गई है
‘एमएसएमई की नई परिभाषा तय करते हुए निवेश और टर्नओवर की लिमिट बढ़ा दी गई है।’
एमएसएमई के छोटे सेक्टर में टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ कर दी गई है।
25 लाख एमएसएमई के पुनर्गठन की उम्मीद है। 2 लाख एमएसएमई नए फंड से शुरू हो जाएंगे।
11 करोड़ से ज्यादा नौकरी एमएसएमई ने दी है।
मोदी सरकार के इस फैसलो अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी के तौर पर देखा जा रहा है। जहां छोटे उद्योग,रेहड़ी पटरी वाले के साथ किसान को फायदा होगा वहीं धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था के रफ्तार को गति मिलेगी।