मुंबई, शशिकांत आळंदीकर: परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की बाणगंगा सरोवर मुम्बई का सेल्फी प्वाइंट औार प्रेरणा का केन्द्र बनाने के विषय में महामहिम राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, श्री दिनेश शाहारा और स्थानीय लोगों से चर्चा हुई।

स्वामी जी ने महामहिम जी से कहा कि सागर के तट पर गंगा आरती हो ताकि लोग यहां पर कुछ पल शान्ति से बिता सके। महामहिम राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने कहा कि यह बहुत ही श्रेष्ठ योजना है।


ऐसा उल्लेख मिलता है कि मुम्बई में समुद्र के तट पर जहां भगवान श्री राम जी माता सीता की खोज में जब पंचवटी निकले तब यहां पर पहुंचे उन्हे इस स्थान पर प्यास लगी उन्होने अपनी प्यास बुझाने के लिये बाण चलाकर मीठा जल निकाला था उसे बाणगंगा सरोवर कहा जाता है।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि बाण गंगा सरोवर के चारों ओर अनेक मन्दिर और धर्मस्थल है यह स्थान अत्यंत पवित्र और रमणीय स्थान है। समुद्र के किनारे इतना मीठा जल वास्तव में अद्भुत है। उस स्थान को सेल्फी प्वाइंट बनाकर प्रेरणा का केन्द्र बनाया जा सकता है जहां पर श्रद्धालु सायंकाल आकर आरती कर सके।

साथ ही आरती का क्रम निरंतर चलाया जा सके इस हेतु भी योजना बनायी जा रही है।स्वामी जी ने बाणगंगा सरोवर का निरिक्षण किया और कहा कि यह स्थान स्वच्छता का प्रेरणास्रोत बन सकता है। यहां से भारत की मायानगरी मुम्बई के लिये स्वच्छता का संदेश प्रसारित किया जा सकता है।

उन्होने कहा कि मुम्बई के पास बाणगंगा रूपी प्राचीन धरोहर है। आने वाली पीढ़ियों को यहां से जागरण और प्रेरणा का संदेश प्राप्त हो ताकि वे अपने राष्ट्र की धरोहर का महत्व समझे और उसे सुरक्षित रखे।स्वामी जी ने कहा कि आज व्यक्ति दिन भर की भागदौड़ भरी जिन्दगी के पश्चात कुछ पल शान्ति से व्यतित करना चाहता है।

जल स्रोत, वृक्ष और प्रकृति के सान्निध्य में ही वास्तविक शान्ति प्राप्त होती है। बाणगंगा जैसे प्राचीन स्थलों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर समाज में विलक्षण परिवर्तन किया जा सकता है।स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के मार्गदर्शन में स्थानीय लोगों ने बाणगंगा सरोवर को सेल्फी प्वांइट एवं प्रेरणा का स्रोत बनाने का संकल्प लिया।