गुरूवार को बॉक्स आफिस पर अक्षय कुमार की फिल्म मिशन मंगल रिलीज हो गई। आजादी के दिन और साथ में राखी के त्यौहार के मौके पर फिल्म ने बेहतर रफ्तार पकड़ी है। छुट्टी के दिन होने के बावजूद दर्शक सिनेमा हॉल तक बड़ी संख्या में आए।

दर्शकों के मूड को अक्षय कुमार ने पकड़ा और स्वतंत्रता दिवस पर मंगलयान जैसे देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित और गर्वीले मिशन की गाथा को दर्शकों के सामने रखा। और जिस तरह के दर्शकों के रियेक्शन आ रहे हैं वो बड़ी हीट की ओर इशारा कर रहा है।

कहानी: फिल्म की कहानी इसरो के मार्स प्रॉजेक्ट पर आधारित है, जब 24 सितंबर 2014 को इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) की कई महिला साइंटिस्टों ने मंगल गृह की कक्षा में सैटलाइट लॉन्च किया था।

इसके बाद भारत विश्वभर में पहला ऐसा देश बना, जो काफी कम बजट में अपने पहले ही प्रयास में इस मिशन में सफल रहा। फिल्म 2010 से शुरू होती है, जहां इसरो का जाना-माना साइंटिस्ट और मिशन डायरेक्टर राकेश धवन (अक्षय कुमार) इसरो की ही साइंटिस्ट और प्रॉजेक्ट डायरेक्टर तारा शिंदे (विद्या बालन) के साथ मिलकर एक जीएसएलवी सी-39 नामक मिशन के अंतर्गत एक रॉकेट लॉन्च करता है।

मगर दुर्भाग्य से उनका मिशन नाकाम साबित होता है। खामियाजे के फलस्वरूप राकेश को इसरो के खटाई में पड़े मार्स प्रॉजेक्ट वाले विभाग में भेज दिया जाता है। वहां होमसाइंस के नियम से तारा को मिशन मंगल का आइडिया सूझता है।

इस प्रॉजेक्ट के लिए ये दोनों इसरो के हेड विक्रम गोखले को आश्वस्त करते हैं, मगर उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है बजट और नासा से बुलाए गए अफसर दिलीप ताहिल का कड़ा विरोध।

राकेश की जिद और कमिटमेंट पर उसे ऐका गांधी (सोनाक्षी सिन्हा), कृतिका अग्रवाल (तापसी पन्नू), वर्षा पिल्ले (नित्या मेनन), परमेश्वर नायडू (शरमन जोशी) और एचजी दत्तात्रेय (अनंत अय्यर) जैसे नौसिखिए साइंटिस्टों की टीम दी जाती है।

ये सभी साइंटिस्ट मंगल मिशन को लेकर जरा भी आश्वस्त नहीं हैं। इनकी अपनी निजी समस्याएं और सोच हैं। तारा शिंदे उनकी सोच को बदलकर उन्हें मिशन मंगल पर जी-जान से जुटने को प्रेरित करती है।

फिल्म के निर्देशक जगन शक्ति ने फिल्म के जरिए अपना डेब्यू किया है। निसंदेह एक साइंस और सच्ची ऐतिहासिक घटना पर आधारित फिल्म के साथ वह अपना प्रभाव जमाने में कामयाब रहे हैं।

निर्देशक ने होमसाइंस और दूसरे साइंटिफिक तथ्यों के आधार पर मंगलयान मिशन के सफर को समझाने की कोशिश की है, मगर स्पेशल इफेक्ट्स के मामले में वह कमजोर साबित हुए हैं।

वीएफएक्स इफेक्ट्स थोड़ा कमजोर रहा है। क्रिस्प कहानी, प्रभावशाली बैकग्राउंड स्कोर और बांधकर रखनेवाला क्लाईमैक्स फिल्म के प्लस पॉइंट हैं। सभी कलाकरों का अभिनय लाजवाब है। अक्षय कुमार ने राकेश धवन की भूमिका को शानदार तरीके से जिया है।

अभिनेत्री के रूप विद्या बालन ने एक साइंटिस्ट और एक आम मां व बीवी की भूमिका को इतनी खूबसूरती से जिया है। ऐका गांधी की भूमिका में सोनाक्षी हॉट लगने के साथ-साथ कन्विंसिंग लगी हैं। तापसी ने अपने किरदार की सहजता को बनाए रखा है।

शरमन जोशी ने अपने चरित्र से दर्शकों का मनोरंजन किया है। संजय कपूर, नित्या मेनन, कीर्ति कुल्हारी, जीशान अयूब, अनंत अय्यर ने छोटी भूमिकाओं के बावजूद सराहनीय भूमिका निभाई है।

अमित त्रिवेदी के संगीत में, ‘मिशन मंगलम’ यादगार बन गया है। कहानी और कलाकार को देखते हुए कल से मिशन मंगल के तेज रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। फिल्म देखने लायक है। यानि पैसा वसूल