वाराणसी। बलात्कार यह वो जख्म है जो एक स्त्री के न सिर्फ शरीर को बल्कि उसकी आत्मा उसके अस्तित्व तक को छलनी और तार-तार कर देता है। यह एक ऐसी अमानवीय कृत्य है जो हँसती खेलती जिंदगी को अंधकार के खाई में धकेल देती है लेकिन अफसोस जिस्म पिशाच रूपी भेड़िये के सामने स्त्री अपनी अस्मिता बचाने की जंग हार जाती है। वहीं हमारा समाज या हम सब या उसे स्वयं दोषी करार देते है या उसकी हालत पर तरस खाकर दो शब्द बोलकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। ये बातें देश और प्रदेश में तेजी से हो रहे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध से आहत उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य श्रीमती मीना चौबे ने कहीं।

श्रीमती चौबे ने देश की जनता से सवाल किया और कहा कि हमें सोचना चाहिए कि क्या हमारा दायित्व एक सामाजिक प्राणी होने के नाते सिर्फ इतना ही है कि क्या हम ऐसी घटनाओं के रोकथाम के लिए सदैव जाग्रत नहीं रह सकते। ।

मीना चौबे ने कहा कि राम व कृष्ण के इस देश में तो कभी भी इस तरह की घटनाएं नहीं हो सकती जहाँ वेद की ऋचाओ में ही “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता ” का भाव हो यह देश मातृभाव का देश है यहां जब आज इस तरह की बढ़ती हुई घटनाओं को देखने व सुनने को मिलता है तो मन बेचैन हो उठता है।
आज जब हैदराबाद के आरोपियों को पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने पर पूरे देश से आत्मसंतोष जैसा भाव व खुशी जैसा माहौल दिखा। इस बात पर उन्होंने कहा कि जब सिनेमा हॉल में किसी विलेन को मारा जाता है तो दर्शक अपने स्थान से उठकर तालियों की गड़गड़ाहट से सिटी बजा कर अपने मन की भाव को प्रकट करता है जब कि वह एक काल्पनिक फ़िल्म होता है। तो आप ही सोचिए जब हम एक काल्पनिक दृश्य को देखकर क्रिया दे सकते हैं तब वास्तविक जीवन में बलात्कार के दंश से मरती हुई स्त्री के लुटेरों को मारने पर अभिव्यक्त क्यों नही कर सकते और बात सिर्फ अभिव्यक्ति तक ही नहीं यहां तो सम्पूर्ण कठोर कानून होने के बाद भी त्वरित न्याय की व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि आखिर किस तरह समाज के एक अंग के मन से भय को निकाला जा सकेगा ? मेरा मानना है कि देश मे ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सजग प्रशासन, त्वरित न्याय, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जाग्रत व चौकन्ना रहना होगा हमारे आसपास हो रही इस तरह की किसी घटना से मुँह फेरना ठीक नहीं है साथ ही बाल्यकाल में बच्चों को माता-पिता की पूरी निगरानी व सदाचरण की शिक्षा देनी चाहिए व शिक्षण व्यवस्था में नैतिक शिक्षा का ज्ञान अति आवश्यक है।

श्रीमती चौबे ने देश कीआधी आबादी से अपील किया कि वो सक्षम व सबल बनें व अपने सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के लिए संकल्प लें। साथ ही लव ऑफ अफेक्शन पर भी उन्होंने सुझाव दिया और कहा कि अपने किसी साथी से भावनात्मक रूप से जुड़ाव की स्थिति में भी चौकन्ना व जाग्रत रहिये जो आपका अपना होगा वह आपकी मर्यादा को कभी तारतार नहीं होने देगा इसलिए भावुकता त्यागिये व दूरद्रष्टा बनिये।