मऊ/ फ़तेह बहादुर गुप्त। जिले के रतनपुरा प्रखंड में इन दिनों शस्त्र आवेदक काफी परेशान हैं। दरअसल अभिभावक की मौत के बाद वरासत के लिए दौड़ रहे शस्त्र आवेदकों को इन दिनों घोर दूश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। वरासत के चक्कर में थाने का चक्कर काटते- काटते आवेदकों के जूते घिस गए। लेकिन थाने के मुहर्रिर को इस से कोई वास्ता नहीं है, लोग परेशान हैं। इन आवेदकों को थाने पर तैनात शस्त्र पत्रावली का कार्य देख रहे मोहर्रिर बार-बार दौड़ाते हैं। किस्तों में कागजात की मांग  करते हैं। जिसे आवेदन को 4 से 5 बार दौड़-दौड़ कर अपने कागजात  देने पड़ते हैं।

जानकारी के मुताबिक वरासत के चक्कर में थाने की गणेश परिक्रमा कर रहे  शास्त्र आवेदकों में विजय कुमार पांडे पुत्र श्री राजेंद्र पांडे हलधर पुर थाना क्षेत्र के बिलौझा ग्राम पंचायत निवासी हैं। इनके ससुर का निधन हो चुका है और इन्होंने वरासत के लिए अपना आवेदन कर रखा है वहीं दूसरी तरफ हलधरपुर थाना क्षेत्र के मुबारकपुर ग्राम पंचायत निवासिनी पूनम सिंह पत्नी लक्ष्मण सिंह ने भी अपने ससुर की मौत के बाद शास्त्र के लिए आवेदन कर रखा है इसके अलावा अशोक कुमार गुप्ता पुत्र स्वर्गीय रामवृक्ष प्रसाद रतनपुरा कस्बा के निवासी हैं इनके पिता रामवृक्ष प्रसाद का निधन हो चुका है इनके पास दोनाली बंदूक है जिसके लिए सेवानिवृत्त फौजी अशोक कुमार गुप्ता ने वरासत के लिए शस्त्र हेतु आवेदन किया है। इन सभी को थाने पर बार-बार दौड़ाया जात है और एक भी पत्रावली पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भेजी नहीं गई। पूनम सिंह के मुताबिक उनकी शस्त्र पत्रावली थाने से तीन तीन बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय को प्रेषित किया गया परंतु आधे अधूरे होने के नाते पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पत्रावली थाने को वापस कर दी।
अब सवाल ये है कि जनता की सेवा के लिए तैनात यूपी पुलिस जनता का शोषण करेगी तो कैसे होगी ज़ीरो टॉलरेंस की परिकल्पना साकार होगी। हालांकि ज़िले में नए कप्तान के आने से थाने की कार्य प्रणाली में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं लेकिन अब देखना यह है कि हलधपुर थाने में बेवजह लटकायी गई शस्त्र पत्रावली को कब तक समुचित आख्या लगाकर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय को प्रेषित की जाती है या पहले की तरह लचर व्यवस्था कायम रहेगी।