मऊ,जगदीश सिंह: देश मे ये नारा जमाने से लगता चला आ रहा है। सरकारें बदलती रहीं – सदी बदल गयी तमाम हुक्मरान बदल गये, लेकिन न नारा बदला न बदला हिन्दुस्तान?
गरीबी, अशिक्षा बेरोजगारी रक्त बीज की तरह कभी समाप्त न होने का बीज मन्त्र बन कर रह गयी है। भरष्टाचार इस सरकार में सुरसा की तरह मुँह बाये व्यवस्था को लील रही है और राजनेता बहादुरी का बखान कर पांच साल में लखपति से करोण पति बनते जा रहे है। गरीब तबाह है। बेरोगार भर रहा आह है। बे रोजगारी की मार से नौजवान बिलबिला रहे हैं और धन पशु खिलखिला रहे हैं।
2013 में पुलिस परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों पर सोमवार को लखनऊ में पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। अभ्यर्थी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे और ज्वॉइनिंग लेटर की मांग कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने जब प्रदर्शन कर रहे युवकों को हटाने का प्रयास किये तो वे पुलिस पर भड़क उठे। हालात को बेकाबू होता देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। अचानक हुए लाठीचार्ज से वहां भगदड़ मच गई। इस लाठीचार्ज ने तीन युवकों के सिर पर चोट लगी, जबकि कई घायल बताये जा रहे हैं। हुसैनगंज स्थित पुलिस भर्ती मुख्यालय घेरने की कोशिश करने वाले अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है। बता दें कि वर्ष 2013 में यूपी पुलिस ने सिपाही भर्ती के मामले में अब तक नियुक्ति पत्र न मिलने से नाराज चयनित 11786 अभ्यर्थी काफी लम्बे समय से नियुक्ति दिलाने जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले अभ्यर्थियों ने आज हुसैनगंज स्थित भर्ती बोर्ड मुख्यालय घेरे का ऐलान किया था।
यूपी पुलिस में खाली पड़े पदों को लेकर 2013 में खाली पद के लिये वान्ट निकाले गए थे.। 11786 पुलिस भर्ती के लिए अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। उनके परीक्षा हुई और नौ महीने पहले अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच भी हो गई लेकिन उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला सब्र का बांध टुट जाने के बाद सड़क पर आना मजबूरी बन गयी लेकिन सरकार निराकरण न कराकर लाठी चार्ज करा रही है। आखिर क्यो? भर्ती गलत थी तो निरस्त हो जाना चाहिये था यदि सही है पुलिस नियमावली के हिसाब से है तो नियुक्ति पत्र मे बिलम्ब क्यो? आखिर त्रिशंकू के तरह लटके पुलिस मे भर्ती जवान कहीं के नहीं हुये है इसके लिये जिम्मेदार कौन है ? सरकार मौन क्यों है?
सरकार द्वारा बेरोजगारी की महामारी के शिकार दर दर ठोकरे खाने वाले देश के होने वाले रक्षकों पर लाठी चार्ज क्यों किया जा रहा है इसका स्थाई समाधान निकाल कर घुट-घुट कर जी रहे जवानो को जीवन दान की कार्यवाही क्यों नही? आखिर कब तक सड़क पर धूल फांकते रहेंगे ?