टोक्यो: परमार्थ निकेतन की साध्वी भगवती सरस्वती जी ने जापान के टोक्यो में होने वाले G 20 इंटरफेथ फोरम शिखर सम्मेलन में शामिल हुईं। 7 से 9 जून 2019 तक चलने वाले तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन की थीम पीपल, पीस और प्लेनेट थी।

इस खास मौके पर साध्वी भगवती ने बताया कि विश्व के सबसे प्राचीन धर्म यही शिक्षा देते है कि सर्वप्रथम सभी लोगों के पास भोजन और पानी की समुचित व्यवस्था हो। अक्सर इन मौलिक जरूरतों के अभाव में समाज में बिखराव और असमानतायें पायी जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान में 820 मिलियन से अधिक लोग भूख से पीड़ित हैं, 780 मिलियन लोगों तक स्वच्छ जल की पहुंच नहीं है और 2Û5 बिलियन लोग स्वच्छता के अभाव में जीवन यापन कर रहे है।
आप को बता दें कि वैश्विक पटेल पर कई धार्मिक संस्थायें इन मुद्दों पर कार्य करती है परन्तु वित्तीय समस्या तथा संगठन के अभाव में कई बार इसके बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं होते। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यह है कि अकाल जैसी स्थिति आने से पूर्व इन मुद्दों को उजागर किया जाये तथा संगठित होकर कार्य किया जाये।
आज के सत्र की अध्यक्ष एलिजाबेत कितनोविक, मानवाधिकार और संचार सचिव, यूरोपीय चर्चो का सम्मेलन तथा स्पीकर साध्वी भगवती सरस्वती, अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस, दिनेश सुना, समन्वयक, जल के विश्व नेटवर्क, टिमोथी अप्पाउ, स्टाफ सदस्य, एशियाई ग्रामीण संस्थान, पादरी, अफ्रीकी बैपटिस्ट फैलोशिप।

वहीँ पैनल को सम्बोधित करते हुये साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि पृथ्वी को ’’जलीय ग्रह’’ कहा गया है परन्तु वर्तमान की बात करे तो भारत में विश्व की कुल आबादी का 18 प्रतिशत है, परन्तु कुल जल संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत है। जल वैज्ञानिकों ने घोषणा कि है कि वर्ष 2030 तक अभी हमारे पास जितना जल है उसका आधा ही रह जायेगा तथा विश्व स्तर पर वर्ष 2040 तक आज की तुलना में जल आधा हो जायेगा। साध्वी जी ने जल के संरक्षण के विषय में भी अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि हम जैविक कृषि, वर्षा जल, शाकाहार, जल संचयन आदि विभिन्न तकनीकी का उपयोग कर जल संरक्षण कर सकते है। साथ ही विश्व स्तर पर स्वच्छता, स्वच्छ जल, शौचालय जैसे मुद्दों पर ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस जो कार्य कर रहा है उस पर विस्तृत प्रकाश डाला।

यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और साध्वी भगवती सरस्वती जी के मध्य अनेक विषयों पर चर्चा हुयी। जब वे यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री थे तब उनके द्वारा महाग्रंथ हिन्दूधर्म विश्वकोश को लांच किया गया था। साध्वी जी ने उन्हे इसके फोटो दिखायें तो वे बहुत प्रसन्न हुये। उन्होने ’पीस’ पुस्तक साध्वी जी के हाथों से लेते हुये कहा कि क्या मैं इसे रख सकता हूँ उन्होने सपत्नीक योग करने के लिये भारत आने की इच्छा व्यक्त की।
साध्वी जी ने कहा कि हम लगभग पूरे विश्व के लोग शिखर सम्मेलन में जीवन, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, चिकित्सा जैसे विषयों पर मंथन के लिये एकत्र होते है परन्तु इस सबसे पहले जल और वायु सबसे प्रमुख है। अगर जल और वायु शुद्ध और प्र्याप्त नहीं होगी तो जीवन नहीं होगा और जब जीवन ही नहीं होगा तो इन सारी बातों पर चिंतन करना व्यर्थ है। इसलिये पहले जल पर चितंन होना चाहिये तभी हम शान्ति की स्थापना कर सकते है।
जी 20 इंटरफेथ फोरम शिखर सम्मेलन में यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, न्यूजीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री सिर जाॅन की, आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री एण्डा केनी, मोजामिबक की पहली शिक्षा मंत्री ग्रासा मचेल, कैंटरबरी के 103 वें आर्कबिशप क्लिफ्टन के लाॅर्ड कैरी, डेविड ईदेस, मुख्य प्रस्तुुत कर्ता और वरिष्ठ प्रसारक, बीबीसी न्यूज, कोल डरहम जूनियर, संस्थापक निदेशक, अन्तर्राष्ट्रीय कानून और धर्म अध्ययन केन्द्र, हर्षि हांडा, अध्यक्ष, विकास के लिये विश्व व्यापी समर्थन, कैथरीन मार्शल, वरिष्ठ सलाहकार, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष, समन्वयक, धर्म और विकास पर संयुक्त राष्ट्र अंतर एजेंसी टास्क फोर्स, जेम्स अलेक्जेंडर, लीड प्रोग्राम विश्लेषक, अमेरिकी राज्य विभाग अमेरिका ने हिस्सा लिया।