नई दिल्ली: बिल्डरों की मनमानी और उनकी ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने रेरा लाया लेकिन उसके बावजूद आज की तारीख में भी लोग लोखों रूपये देकर बिल्डर के कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। एक बानगी देखिए और खुद समझिए किस रियल एस्टेट की क्या स्थिति है?
1.बिल्डर            प्रभावित आवंटी            फंसे प्रोजेक्ट
2.अंसल                  6500                 1, हाईटेक टाउनशिप
3.रोहतास               1800                  4, दो इंटीग्रेटेड टाउनशिप
4.शाइन सिटी          8000                  6 से अधिक
5.आरसंस              2500                  4 या अधिक प्रोजेक्ट
6.श्री इंफ्रा              800                   3
प्रोपलरिटी          1500                  5-6 प्रोजेक्ट प्रस्तावित रहे।
आश्चर्य की बात ये है कि इनमें से कई बिल्डरों ने तो अब अपनी दुकान ही समेट ली है। इनके कार्यालय तक बंद हो चुके हैं। रेरा में इस समय अंसल के अलावा रोहतास, आरसंस, शाइन सिटी बिल्डर कंपनियों के वादों पर सख्ती हुई है। सबसे अधिक शिकायतें इन बिल्डरों के खिलाफ भी हैं। कुछ ऐसे बिल्डरों की भी शिकायतें रेरा को मिली हैं जिनके प्रोजेक्ट ही पंजीकृत रेरा में नहीं कराए गए।
इनमें प्रमुख रूप से शाइन सिटी , एमार एमजीएफ, श्रीइंफ्रा, प्रोपलरिटी,सहारा सिटी होम्स, रतन हाउसिंग,  शामिल हैं। इनमें से अधिकांश के खिलाफ पुलिस में भी एफआईआर दर्ज कराई गईं।
रेरा के अधिकारियों का कहना है कि हमारी पहली प्राथमिकता आवंटियों के हित को पूरा करना है। दरअसल ये प्लानिंग के तहत किया जाने वाला कारनामा है। ऐसे में जरूरत है संगठित होकर कानूनी और समाजिक तरीक़े से ऐसे बिल्डरों पर प्रेसर बनाया जाय ताकि जिनके लोखों रूपये फंसे हैं उनके निकल जायें।
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