देहरादून: देश तरक्की कर रहा है, प्रदेश विकास कर रहा है। इससे भी कोई इंकार नहीं कर सकता है लेकिन आज भी उत्तराखंड के बहुत ऐसे इलाके हैं जहां रोड नहीं है। ताजा मामला देहरादून जिले के चकराता तहसील का है जहां बुरायला गांव की एक प्रसूता को सड़क नहीं होने की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ा।


मामला कुछ दिन पहले का है जरूर है लेकिन सोचने को मजबूर करता है। रमेश की पत्नी रीना गर्भवती थी। इस दौरान उसे लेबर पेन हुआ अस्पताल जाना था लेकिन सड़क नहीं होने के कारण उसे बांस के डंडे में बांध कर ले जाना पड़ा। बच्चे के जन्म के दौरान अधिक रक्त स्राव के कारण प्रसूता की तबियत खराब होता देख मंगलवार को परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने की ठानी। लेकिन सड़क नहीं होने के कारण परिजन रीना को बांस के डंडों में बांधकर लोखंडी रोड हैड तक 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ा कर अस्पताल पहुंचाया।
रोड हैड पर पहुंच परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। जो करीब एक घंटे के बाद मौके पर पहुंच सकी। इसके बाद परिजन रीना को करीब 72 किमी दूर सीएचसी विकासनगर ले कर पहुंचे, लेकिन यहां भी डॉक्टरों ने अधिक रकतस्राव होने के कारण रीना को हायर सेंटर रेफर कर दिया।

इसके बाद परिजन उसे लेकर विकासनगर से 45 किलोमीटर दूर देहरादून के लिए रवाना हो गए। परिजनों के अनुसार वर्तमान में रीना का देहरादून स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। कुल मिलाकर कहा जाए तो गांव में सड़क न होने की वजह से रीना करीब 131 किलोमीटर तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती रही। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण उन्हें 14 किमी की चढ़ाई चढ़ने में करीब दो घंटे का समय लग जाता है। अब ऐसा नहीं है कि लोगों ने सड़क निर्माण को लेकर संबंधित विभाग से बात नहीं कि लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।