नई दिल्ली: 1985 में एक फिल्म आई थी, नाम था Tawaif । उसमें एक गीत आशा जी की आवाज में रति अग्निहोत्री पर फिल्माया गया था। बोल थे… बड़ी देर से दर पे आंखें लगी थी, हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।मसीहा मेरे तूने बीमार गम की, दवा लाते लाते बहुत देर कर दी। मोहब्बत के दो बोल सुनने ना पाए, वफाओं के दो फूल चुनने ना पाए, तुझे भी हमारी तमन्ना थी जालिम,बताते-बताते बहुत देर कर दी। कोई पल मे दम तोड़ देंगी मुरादें, बिखर जाएंगी मेरी ख्वाबों की यादें, सदा सुनते-सुनते, खबर लेते-लेते, पता पाते-पाते बहुत देर कर दी। बड़ी देर से दर पे आंखें लगी थी, हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।
आप सोच रहे होंगे की आज इस गीत को क्यों आपके जेहन में लाने की कोशिस कर रहा हूं। बात बस छोटी सी है…गरीब बच्चों की मौत!
आप जरा इस गीत के बोल को एक तरफ मन-मस्तिष्क में प्ले कीजिए और दूसरी तरफ ये…
बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की हो रही मौत पर पहली बार पीएम मोदी ने अपनी बात कही है। पीएम मोदी ने आज राज्यसभा में अपने अभिभाषण के दौरान कहा कि चमकी बुखार या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के कारण बिहार में हुई मौतें दुर्भाग्यपूर्ण हैं और हमारे लिए शर्म की बात है।
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सात दशकों में हमारी विफलताओं में से ये भी एक बड़ी विफलता है। हमें इसे गंभीरता से लेना होगा। मैं राज्य सरकार के लगातार संपर्क में हूं और मुझे यकीन है कि हम सामूहिक रूप से जल्द ही इस संकट से बाहर आ जाएंगे।
भगवान करे बिहार और यूपी (गोरखपुर) इस बला से जल्दी निजात पा ले। मेरा दावा है कि जब आप इस गीत को यूट्यूब या कहीं अन्य साधन पर चलते देखेंगे और इस बोल पर बिहार में एक-एक कर मर रहे बच्चों के परिजनों की चीख-पुकार को महसूस करेंगे तो सिस्टम, सरकार औऱ वो सभी दावे-वादे ध्वस्त होते नजर आएंगे।
बच्चों की मौत के गुनहगार सिर्फ सिस्टम और सरकार नहीं है, दोष हम सब का भी है।