नई दिल्ली, शशिबाला: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने 8 जुलाई को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि यह अवकाशकालीन पीठ है मामले को नही सुन सकती। इस मामले को रेगुलर बेंच सुनेगी। क्योंकि कोर्ट को लगता है कि इस मामले में कोई अर्जेन्सी नही है। यह याचिका पेशे से वकील मनमोहन सिंह व शिमिष्टा कुमारी ने दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया जाए। याचिका में कहा गया है कि 52 सदस्यों के साथ कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। कानून के मुताबिक वह इस पद का असली दावेदार है। इस संबंध में कोई संशय की स्थिति नहीं है, क्योंकि इस नियुक्ति को लेकर कानून बिल्कुल स्पष्ट है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को विपक्ष का नेतृत्व प्रदान करने से रोकना गलत उदाहरण होगा और इससे लोकतंत्र कमजोर होगा। याचिका में कहा गया है कि सत्ता पक्ष पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए शक्तिशाली विपक्ष का होना अनिवार्य है, क्योंकि लोकतंत्र के समुचित ढंग से काम करने के लिए विरोध काफी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यह कोई औचित्य नही है कि कांग्रेस इसलिए नेता प्रतिपक्ष के पद का दावा नहीं कर सकती। क्योंकि उसके पास सदन में कुल सांसदो के 10 फीसदी हिस्सा नहीं ही। सदन नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता राजनीतिक या अंकगणितीये फैसल नहीं है, बल्कि वैधानिक फैसला है।