पटना,अनूप नारायण सिंह:यूपी के चंदौली जिले के एक सामान्य किसान परिवार से देश की सियासत के सबसे बड़े नेताओं में से एक बनने के सफर तक राजनाथ सिंह ने अपने जीवन में इससे पूर्व कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राजनाथ सिंह को देश की सियासत के एक कद्दावर चेहरे के रूप में जाना जाता है और उत्तर प्रदेश के सीएम से लेकर एनडीए की सरकारों में उन्होंने इससे पूर्व कई बड़ी जिम्मेदारियों पर सफलता पूर्वक काम किया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बेहद करीबी राजनाथ सिंह के इसी अनुभव को देखते हुए पीएम मोदी ने उन्हें एक बार फिर देश के शीर्षतम मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ यूपी की राजधानी लखनऊ से सांसद बने हैं और इस सीट पर उन्होंने दूसरी बार चुनाव जीता है।
चंदौली के भभौरा गांव में जन्मे राजनाथ सिंह अपने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। विद्यार्थी काल से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ सक्रियता से काम करते हुए राजनाथ सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी की डिग्री हासिल की।

राजनाथ अपने विद्यार्थी जीवन में एबीवीपी से जुड़े रहे और 1969 में उन्होंने विद्यार्थी परिषद के सचिव पद से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद 1974 में राजनाथ मिर्जापुर में जनसंघ के सचिव बनाए गए। जनसंघ के शुरुआती दिनों में ही राजनाथ ने आपातकाल के वक्त जेल काटी और फिर सक्रिय रूप से देश की राजनीति में उतर गए।
पहली बार राजनाथ सिंह ने 1977 में यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ा निर्वाचित हुए। इसके बाद 1986 में वह बीजेपी के युवा मोर्चा में राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए।

1988 में राजनाथ को बीजेपी युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए और इसी साल उन्होंने यूपी में विधान परिषद का चुनाव भी जीता। साल 1991 में राजनाथ को यूपी की कल्याण सिंह सरकार में शिक्षामंत्री बने और इस कार्यकाल के दौरान नकल विरोधी कानून को लेकर उन्होंने कई निर्णायक कदम उठाया। अपने शिक्षामंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने स्कूलों में वैदिक गणित को पाठ्यक्रम का हिस्सा भी बनाया।साल 1994 में राजनाथ सिंह संसद के सदस्य बनकर राज्यसभा पहुंचे।

इसके बाद मार्च 1997 के बदलते सियासी दौर में राजनाथ को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया। संगठन पर एक पारखी पकड़ रखने वाले राजनाथ ने बतौर प्रदेशाध्यक्ष अपने कार्यकाल में बीजेपी को यूपी में काफी मजबूत बनाया और इसके प्रतिफल के रूप में साल 2000 में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें यूपी सरकार के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी। दो साल सीएम रहने के बाद राजनाथ सिंह 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कृषि मंत्री बने।

साल 2004 में यूपीए के सत्ता में आने के बाद राजनाथ सिंह को 2005 में पहली बार बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। इसके बार राजनाथ सिंह करीब 4 साल तक बीजेपी के शीर्षतम पद पर रहे और इस दौरान उन्होंने पार्टी को देश के तमाम हिस्सों में मजबूती दी। साल 2009 में राजनाथ सिंह पहली बार गाजियाबाद लोकसभा सीट से सांसद बने। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर 2013 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए ही नरेंद्र मोदी को बीजेपी की ओर से पीएम पद का चेहरा बनाया गया और 2014 के चुनाव में राजनाथ सिंह ने मोदी के साथ मिलकर देशभर के तूफानी दौरा किया।

इस चुनाव में बीजेपी को प्रचंड जनादेश मिला और फिर राजनाथ सिंह देश के गृहमंत्री बनाए गए। इसके बाद तमाम राज्यों के विधानसभा चुनाव में राजनाथ बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे और फिर 2019 में उन्होंने दोबारा लखनऊ संसदीय सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में राजनाथ को तीन लाख से ज्यादा वोटों से जीत मिली।गृहमंत्री के तौर पर भी राजनाथ सिंह ने देश के कई बड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पांच साल के कार्यकाल में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और भारत के बीच सीमा सुरक्षा और कूटनीति के स्तर पर कई बड़े फैसले किये हैं।
इसके अलावा उरी और पुलवामा के हमलों के बाद पाकिस्तान के आतंकी कैंपों पर हुई स्ट्राइक के फैसलों में राजनाथ सिंह ने पीएम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में एनआरसी लागू करने, जम्मू-कश्मीर में सरकार के साथ समन्वय एवं बीजेपी संगठन के साथ सरकार के कामकाज तक में राजनाथ सिंह ने निर्णायक भूमिका अदा की।