नई दिल्ली: एन.सी.पी. के अध्यक्ष शरद पवार महाराष्ट्र में एक नई इबारत लिख रहे हैं। यदि सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से हुआ तो बसपा सुप्रीमो मायावती अगले महीने राज्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि पवार व मायावती विदर्भ क्षेत्र में एक साथ रैली कर सकते हैं और इसके लिए रैली स्थल की खोज की जा रही है। यह रैली अक्तूबर महीने में हो सकती है। इस पर विस्तृत चर्चा पवार और मायावती के बीच पिछले सप्ताह हो चुकी है। 60 मिनट की इस बैठक में जो हुआ उसकी जानकारी अब धीरे-धीरे राजनीतिक गलियारों में पहुंच रही है।
शरद पवार राज्य में बड़े स्तर पर दलितों को संगठित करने के लिए काफी उत्सुक हैं। उनका मानना है कि भारत की रिपब्लिक पाॢटयां कई टुकड़ों में बंटने के कारण अब अप्रासंगिक हो गई हैं। यहां तक कि प्रकाश अंबेदकर हाशिए पर हैं और उनका आधार काफी कम हो गया है। उनकी अनिच्छा के चलते ही पवार को दूसरे विकल्प की तरफ सोचने को विवश कर दिया गया। यदि मायावती का प्रवेश एन.सी.पी. और कांग्रेस के महागठबंधन में होता है तो विदर्भ के साथ-साथ अन्य इलाकों में भी दलित वोट मोबलाइज होगा।
जहां तक विदर्भ का सवाल है तो यहां मायावती का काफी अच्छा दबदबा है। दलित वोट बैंक तभी मजबूत होगा यदि मायावती राष्ट्रीय चेहरे के रूप में उभरे। राहुल गांधी शरद पवार के साथ पहले ही 3 बार बैठक कर राष्ट्रीय स्तर के गठबंधन की वकालत कर चुके हैं। अक्सर राहुल को पवार के आवास की तरफ जाते देखा गया, लेकिन जब मायावती का मामला आया तो यह मराठा नेता स्वयं मायावती के आवास गए और उनके आगे जल्द से जल्द गठबंधन पर मोहर लगाने की बात कही। पवार ने मायावती को महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का लालच इसलिए भी दिया है कि वह यू.पी. के बाहर पार्टी का विस्तार करने को काफी उत्सुक हैं।